Thursday, 12 March 2026

देख लेना...

Elegant beauty


खुद को देखना हो फुरसत से, मुस्कुराहट ओढ़े,

मैं तो कहता हूँ जलते हुए, फुलझडियां देख लेना,


आईने में कभी भी मत देखना खुद को गौर से,

खुद की नजर ना लगे, ऐसा करना, परियां देख लेना,


मेरी नजर से तो सोचना भी मत खुद को देखने की,

फिर आईने में ही खुद को इससे बढ़िया देख लेना,


कहीं हो गई खुद से मोहब्बत तो इतराते फिरोगे,

मोहब्बत, नजर से भी बुरी है, नजरिया देख लेना,


और सादगी जँचती है तुम पर, अगर सच पूछो तो,

यकीन न हो तो खुद को, एक दो घड़ियां देख लेना,


झील नहीं देखी है मैंने, बस तुम्हारी आँखें देखी है,

तुम मेरी आँखें मत देखना, कोई दरिया देख लेना,


मुझे देखना हो तो रात देखना, सर्द अमावस की,

खुद को देखना हो तो सर्द में, दुपहरिया देख लेना,



A sole composition to dedicate on Birthday, which won't even come before the person in centre, due to some fortunate reasons (the firm decision about not trying to make any kind of approach, whatever the result is expected).

By the way, some links to approach me for my works (significant and trivial) are provided below: