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| Regret : I could have told... |
It's not necessary for every person to be a friend. But the reverse is also true. It's not necessary for every friend to be a person. Every known or unknown source of our happiness, be it a person or a thing, can be considered a friend. And happiness has a wide range of varieties. But friendship is about sharing, caring, standing along and vibe matching is Cherry on the Cake. I welcome you to this blog where I share my literary works. They're of both fictional and non-fictional type. Have a look
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| Regret : I could have told... |
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| Baad me Likhunga |
आपकी साँझ जैसी आँखों से निकल पाया तो कुछ लिखूंगा,
यानी कि आंखों से चेहरे तक फिसल पाया तो कुछ लिखूंगा,
कुछ लिखने खातिर मुनासिब होगा कि आपको फिर से देखूं,
पर आपको देखने के बाद मैं सम्भल पाया तो कुछ लिखूंगा,
आप के आगे तो गुलदस्ता अपना चेहरा छिपाता ही होगा,
आप छू दें तो सदाबहार बाकी फूलों मे इतराता ही होगा,
आप किसी फुलवारी की तरफ कभी जा कर तो देखिए,
गुलाब अपने ही पसीने में ना पिघल पाया तो कुछ लिखूंगा,
ये गुजारिश है कि बुरा मत मानिएगा मेरी किसी बात का,
आप भाभी हैं, आपसे रिश्ता बनता है मेरा हंसी मजाक का,
आप तो जानती होंगी लोग तारीफें कब और क्यों करते हैं,
इन झूठी तारीफों से आपका मन बहल पाया तो कुछ लिखूंगा,
आपके प्रति मेरा आदर और सम्मान बना रहे वैसा ही,
सो मैंने प्रभु से नहीं मांगा एक हमसफर आप जैसा ही,
आप दोनों को मुस्कुराता देखूंगा तो कहां फुरसत होगी मुझे,
अपनी उस खुशी को शब्दों में बदल पाया तो कुछ लिखूंगा,
The poetry is written to present with a gift in the beautiful memory of first casual meeting at a railway station. This poetry is the compensation for not gifting right at the time.
By the way, some links to approach me for my other works (significant and trivial) are provided below:![]() |
| Apna Shahar aur Paraya Shahar |
दूसरे शहर में चाहे कितना भी खुशनुमा मंजर होता है,
अपना शहर, कभी भी आखिर अपना शहर होता है,
अपने शहर में होते हैं अपने लोग और अपनी यादें,
सबसे खास कि लौटने के लिए अपना एक घर होता है,
शाम को देर से घर आने पर भले पापा कुछ न बोलें,
लेकिन खाना खाने में देरी करने पर माँ का डर होता है,
बहनों के साथ होती हैं नोक - झोंक, या किसी की चुगली,
बहन भाई के बीच प्यार ही कुछ इस कदर होता है,
दूसरे शहर में मिल जाए शायद पिज़्ज़ा, बर्गर, या फ्राइज,
अपने शहर का वो एक दुकान का समोसा बेहतर होता है,
दूसरे शहर में चलना पड़ता है खुद को बच बचा कर,
यहां सॉरी सर और सॉरी मैम तो दिनभर होता है,
अपने शहर में होता है आदमी अपने मर्जी का मालिक,
दूसरे शहर में कुछ पैसों के लिए किसी का नौकर होता है,
हम साल भर का इंतजार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
हम व्रत, पर्व और त्योहार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
पकवान खरना का खीर और,
डेजर्ट समझना कचवनिया,
हम एकजुट हुआ परिवार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
दिवाली की साफ-सफाई और रोशनी,
होली में दिलों का मिलना,
हम जब इन दोनों का सार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
ढाई आखर के सब अच्छे नाम,
विष्णु, लक्ष्मी, कृष्ण और राम,
हम बस मुस्कान से इनकार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
मतलबी लोगों के बदल जाते होंगे,
बात-बात पर बात के मतलब,
हम एक बार कहें या बार बार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
किसी को बेहद प्यार है Passion से,
किसी को शहर से इश्क है,
हम अपना इश्क़, प्रेम या प्यार कहें,
तुम छठ समझ लेना,
मिसाल क्यों ढूंढनी किसी और दुनिया में,
भाईचारा और सौहार्द की,
हम भारत कहें, और फिर बिहार कहें,
तुम छठ समझ लेना...❤️
This year, very first time, out of my village on Chhath. This feeling is saddening by the way, but teaches a lesson that life is not about every expectation comes true and it doesn't runs as planned. It's not always in your hands. Sometimes you have responsibilities, sometimes you have no option.
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| Elegant beauty |
खुद को देखना हो फुरसत से, मुस्कुराहट ओढ़े,
मैं तो कहता हूँ जलते हुए, फुलझडियां देख लेना,
आईने में कभी भी मत देखना खुद को गौर से,
खुद की नजर ना लगे, ऐसा करना, परियां देख लेना,
मेरी नजर से तो सोचना भी मत खुद को देखने की,
फिर आईने में ही खुद को इससे बढ़िया देख लेना,
कहीं हो गई खुद से मोहब्बत तो इतराते फिरोगे,
मोहब्बत, नजर से भी बुरी है, नजरिया देख लेना,
और सादगी जँचती है तुम पर, अगर सच पूछो तो,
यकीन न हो तो खुद को, एक दो घड़ियां देख लेना,
झील नहीं देखी है मैंने, बस तुम्हारी आँखें देखी है,
तुम मेरी आँखें मत देखना, कोई दरिया देख लेना,
मुझे देखना हो तो रात देखना, सर्द अमावस की,
खुद को देखना हो तो सर्द में, दुपहरिया देख लेना,