Tuesday, 24 March 2026

छठ समझ लेना...

 



हम साल भर का इंतजार कहें,

तुम छठ समझ लेना,

हम व्रत, पर्व और त्योहार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


पकवान खरना का खीर और,

डेजर्ट समझना कचवनिया,

हम एकजुट हुआ परिवार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


दिवाली की साफ-सफाई और रोशनी,

होली में दिलों का मिलना,

हम जब इन दोनों का सार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


ढाई आखर के सब अच्छे नाम,

विष्णु, लक्ष्मी, कृष्ण और राम,

हम बस मुस्कान से इनकार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


मतलबी लोगों के बदल जाते होंगे,

बात-बात पर बात के मतलब,

हम एक बार कहें या बार बार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


किसी को बेहद प्यार है Passion से,

किसी को शहर से इश्क है,

हम अपना इश्क़, प्रेम या प्यार कहें,

तुम छठ समझ लेना,


मिसाल क्यों ढूंढनी किसी और दुनिया में,

भाईचारा और सौहार्द की,

हम भारत कहें, और फिर बिहार कहें,

तुम छठ समझ लेना...❤️


This year, very first time, out of my village on Chhath. This feeling is saddening by the way, but teaches a lesson that life is not about every expectation comes true and it doesn't runs as planned. It's not always in your hands. Sometimes you have responsibilities, sometimes you have no option.


By the way, some links to approach me for my works (significant and trivial) are provided below: