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| Apna Shahar aur Paraya Shahar |
दूसरे शहर में चाहे कितना भी खुशनुमा मंजर होता है,
अपना शहर, कभी भी आखिर अपना शहर होता है,
अपने शहर में होते हैं अपने लोग और अपनी यादें,
सबसे खास कि लौटने के लिए अपना एक घर होता है,
शाम को देर से घर आने पर भले पापा कुछ न बोलें,
लेकिन खाना खाने में देरी करने पर माँ का डर होता है,
बहनों के साथ होती हैं नोक - झोंक, या किसी की चुगली,
बहन भाई के बीच प्यार ही कुछ इस कदर होता है,
दूसरे शहर में मिल जाए शायद पिज़्ज़ा, बर्गर, या फ्राइज,
अपने शहर का वो एक दुकान का समोसा बेहतर होता है,
दूसरे शहर में चलना पड़ता है खुद को बच बचा कर,
यहां सॉरी सर और सॉरी मैम तो दिनभर होता है,
अपने शहर में होता है आदमी अपने मर्जी का मालिक,
दूसरे शहर में कुछ पैसों के लिए किसी का नौकर होता है,
