Showing posts with label Shashikant Sharma. Show all posts
Showing posts with label Shashikant Sharma. Show all posts

Friday, 10 April 2026

अपना शहर

Apna Shahar aur Paraya Shahar

दूसरे शहर में चाहे कितना भी खुशनुमा मंजर होता है,

अपना शहर, कभी भी आखिर अपना शहर होता है,


अपने शहर में होते हैं अपने लोग और अपनी यादें,

सबसे खास कि लौटने के लिए अपना एक घर होता है,


शाम को देर से घर आने पर भले पापा कुछ न बोलें,

लेकिन खाना खाने में देरी करने पर माँ का डर होता है,


बहनों के साथ होती हैं नोक - झोंक, या किसी की चुगली,

बहन भाई के बीच प्यार ही कुछ इस कदर होता है,


दूसरे शहर में मिल जाए शायद पिज़्ज़ा, बर्गर, या फ्राइज,

अपने शहर का वो एक दुकान का समोसा बेहतर होता है,


दूसरे शहर में चलना पड़ता है खुद को बच बचा कर,

यहां सॉरी सर और सॉरी मैम तो दिनभर होता है,


अपने शहर में होता है आदमी अपने मर्जी का मालिक,

दूसरे शहर में कुछ पैसों के लिए किसी का नौकर होता है,


By the way, some links to approach me for my works (significant and trivial) are provided below:

Saturday, 30 November 2024

...... के बाद



उनको देख पाने का आख़िरी मौका खोने के बाद,

उनका भी नहीं रहा मैं सिर्फ उनका होने के बाद,

(After losing the last chance to see her, I couldn't be her despite belonging to her only.)


अब धुंधली पड़ जाएगी उनकी छवि मेरे चित्त से,

कुछ नहीं रहेगा यादों की माला पिरोने के बाद,

(Now her face will blur out of my mind and there will left nothing despite stringing a garland her memories.)


मैं चाहता नहीं हूं वो हो जाए सपना मेरे खातिर,

ये मैं चाहता हूं उनके ही सपने संजोने के बाद,

(I don't want her to become a dream for me. And I want this after dreaming of her.)


मैं चाहता हूं उनके सपने आए तो मैं जागूं ही ना,

यानी उनके सपने देखूं हमेशा खातिर सोने के बाद,

(I don't want to wake up after dreaming of her. It means I want to dream about her after my permanent sleep (de@th).)


बताऊं किसको, कौन सुनेगा और समझेगा मुझे,

आदमी कहां आदमी समझा जाता है रोने के बाद,

(Whom to tell, who will listen to me and feel it? Men are not considered men after once they cry.)


Composed this poetry on the day of someone's final paper. The ongoing exams were the only known dates on which there were opportunities to see her. But none of the 3 days of the final papers of last semester could she be seen. From now on, there are no confirm dates when she comes out of her house, her village and is seen. There are only uncertainty and luck. There left only wishes to God for a glance of her.

Poetry is composed on the request and interest of one of my friends who knew I write the unspoken words of else's. Unspoken in the sense of not spoken to the deserving person or targeted person. It is same like if a gift is given to the needy, it is no more a gift, but a donation. And if a donation is given to dear person, it is no more a donation, but a gift. Hence, if it is not said to the targeted person, it is unspoken.

By the way, some links to approach me for my works (significant and trivial) are provided below:

Monday, 7 February 2022

बुरा लगता है...

 

बुरा लगता है...

निधि नरवाल की एक कविता है, Odd One Out (बुरा लगता है)। मैंने उस कविता को अपने शब्दों में लिखने का प्रयास किया है। जब दोस्त के कदम (किन्ही मजबुरियों में ही सही) एक बार बाहर निकल जाते हैं, तो उसकी दुनिया बदल जाती है। फिर चाहे आपके या उसके लिए दुनिया का अर्थ कुछ भी हो।

इसी पर कहा है

दोस्त निकल के औरों के हैं दोस्त हो गए

उनका क्या जो गाँव में ही बेकार हैं बैठे,

(Friends became friends of many after once going out. But what about those who didn't go out ever?)

कुछ के हैं सहपाठी कुछ के सहकर्मी है,

हम ही हैं, जो अपने मन को मार हैं बैठे,

(Some have classmates and some have colleagues. Only we are here with hopelessness and disappointment.)

जीत लिया कुछ ने वो हीरा आसानी से,

खेला ना, फिर भी वो दोस्ती हार है बैठे,

(Some has effortlessly won the diamond (my friend), while we lost it without playing a game.)

घुमे जिन संग हमने बाग-बगीचे, आहर,

यादों के संग आज भी अपने द्वार हैं बैठे,

(Sitting at the doorsteps with the memories when used to walk across the orchards, gardens and water reservoirs.)

मेरा बस है वो और उसका एक मैं भी हूँ,

हम फारिग हैं, दोस्त से पर लाचार हैं बैठे,

(I have only him, while he has me like many others. We are free, but helpless by our friends.)

मिलते रहने के वादे पर जो थे दस्तखत,

कागज़ का वो टुकड़ा तो हम फाड़ हैं बैठे

(Torn off the piece of paper on which we had signed the agreement of keeping in touch.)


This poetry is already published on my YourQuote page (link below) on February 19, 2024. But reposting it here so that more readers can shower love.

By the way, some links to approach me for my works (significant and trivial) are provided below:

Thursday, 18 June 2020

तुम और तुमसे जुड़ा मेरा बचपन........

Memories are sometimes best friends
Tum aur tumse juda mera bachpan

वो यादें हसीन हुआ करती थी, जो यादें पीछे छुट गईं
वो ज़िंदगी कितनी प्यारी थी, जाने क्यों हमसे रूठ गयी,
तेरे सपने हसीन होते होंगे, पर मेरी नींद थी टूट गयी,
जब नींद खुली तुमको देखा, बाकी के चेहरे मिट गए,

तुम ख़्वाब, खयाल से सुंदर थी, तुम सरल, सहज तुम निःछल थी,
भले आज-अभी तुम मिली मुझे, पर मेरे लिया तुम ही कल थी,

मेरी कल तक की अंधियारी थी, मेरी आज की सुबह सुहानी थी,
मेरे आने वाले कल के लिए, तुम ईश्वर की कोई मेहरबानी थी,

मेरी सूरज थी जगने की वजह, सोने के लिए तुम सपना थी,
मेरी कल्पना जहां पर होती खतम, उससे भी अच्छी रचना थी,

तुम्हारे घर की तरफ मेरी खिड़की के, दरवाजे खुला ही रखता था,
तुम खिड़की पर जुल्फ़ लहराती, मैं हल्के से फुंका भी करता था,

तुम जब भी योगा करती थी, मुझे साँसे महसूस तेरी होती थी,
मेरा भी मन नहीं लगता था, जब भी तुम हल्की भी रोती थी,

School के लिए मुझको लेने, जब भी मेरे घर आती थी,
मैं जान कर देरी करता था, जब भी तुम मुझे बुलाती थी,

जब class room में पास-पास, teacher हमें नहीं बिठाते थे,
तो छुट्टी में अपनी Cycle को, puncture ही हमेशा पाते थे,

कभी class bunk करके भी मैं, जब आम तोड़ने जाता था,
मेहनत से एकाध जो मिलता था, तेरे लिए बचा कर लाता था,

मेरा पढ़ना-लिखना तेरे लिए, मेरी Notebook से मेरी Diary तक,
मेरी Drawing, कविता, कहानी भी, मेरे भाषण से मेरी शायरी तक,

मेरे teacher मुझे समझते थे, मैं नालायक था, मैं बेहूदा था,
वो नहीं जानते तेरे कसम पर मैं, school के छत से कूदा था,

किसी Flag march, किसी Rally मैं, तेरे पीछे ही मैं रहता था,
तेरे कदम से लेकर Slogan तक, मैं तुझको Follow करता था,

जब teacher तुमसे पुछते, खुद को Future Doctor बताती थी,
तब हौले से मेरे दिल में कहीं, मरीजों वाली feeling आती थी,

अंताक्षरी में तेरा Sad song, पंद्रह अगस्त को देशभक्ति गाने,
हर शनिवार को गणेश वंदना, क्यों सुनते थे, तू क्या जाने,

तेरे मोहल्ले में जब भी हरीकीर्तन हो, मैं घंटों झाल बजाता था,
माता की चौकी अपने घर, मैं बस तेरे लिए ही रखवाता था,

जब कभी हमारा आमना-सामना, school के खेलो में होता,
मैं हार के खुश था तुम जीती, मैं जीत के भी खुश था मैं जीता,

तेरे संग यूं ही भींग जाने की, उतनी ही होती है ख़्वाहिश,
School के रस्ते में कभी जैसे, हो जाती थी हल्की बारिश,

पर आज तो तुम कुछ और ही हो, कुछ और ही है तेरी बातें,
मेरे याद दिलाने से भी तुझे, नहीं याद आएंगी वो यादें,

वो वादें मिलते रहने की, वो सपने बनाने का हमसफर,
सब तोड़ देता एक झटके में, मम्मी/पापा का transfer,

तुम वसंत सी फैली हरियाली, और मैं पतझड़ सा सूनापन,
वो दिन भी कितने अच्छे थे, कोई काश लौटा दे वो बचपन !!!
Social Media पर Follow करो,
Kalamwali
Subscribe on my YouTube Channel

Friday, 5 June 2020

क्या वो इश्क़ नहीं था.........

Hardoi Wala Ishq

तुम्हें देख लेने के बाद जो होंठो पर मुस्कुराहट होती थी,
तुम्हें एकटक देखने पर दिल में जो घबराहट होती थी,
जहां से तुम चले जाते थे, वहीं पर तुम्हें देर तक निहारना,
इसे नादानी मत कह देना, भले ही वो मेरा पागलपना था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

याद तो तुम्हें भी हो गया था, मेरी खिड़की की बनावट,
हाँ भले ही तुम भूल गए होगे, मेरी दिवाली की सजावट,
मैंने देखा था तुम्हारे Desperation को, मुझे देखते वक़्त,
अपने खुदा से मैंने तुम्हारे लिए भी, कुछ तो ज़रूर कहा था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

तुम दिल के इतने करीब थे कि जैसे मानो मेरे पड़ोसी थे,
मेरे पहले-पहले पागलपन के लिए, सिर्फ तुम ही दोषी थे,
तुम्हें तो पता है न लड़कियों के Nature और Attitude का,
फिर भी मैंने तुम्हें अपना प्यार, जताने का प्रयास किया था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

Balcony कभी छत और कभी दरवाजे से दिख जाते थे,
हल्की बेचैनी सी होती थी जब, तुम नज़र नहीं आते थे,
तुम भी तो देखा करते थे मुझे, मोहब्बत की ही नज़रों से,
तो फिर तुमसे मोहब्बत करना, क्या मेरे लिए गुनाह था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

औरों से अलग लगता था, तुम्हारा मुझे देखने का तरीका,
लड़कों में मैंने नहीं देखा, लड़की के लिए इतना सलीका,
तुम्हारे इन्हीं सब बातों की मुझे आदत सी हो गयी थी,
तुम से मिलने के बाद मेरे लिए, सबकुछ नया-नया था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

मेरे लिए वो सबकुछ इश्क़ था, और मैंने तुम्हें ये जताया भी,
तुम भी मुझे उतना ही चाहते थे, ये आँखों से तुमने बताया भी,
अब ये मेरा डर कह लो, या मेरी Attitude जो मैंने बोला नहीं,
लेकिन जाते-जाते तुमने भी अपनी Feelings नहीं कहा था,
तुम बताओ तुम्हारे लिए, वो इश्क़ नहीं था तो क्या था,

Friday, 3 April 2020

किसी के Sorry का इंतज़ार नहीं करता...

My self-portrait sketch

मेरी प्रवृति, मेरी प्रकृति, मेरा अभिमान मांगने,
कुछ लोग आए थे मुझसे मेरी पहचान मांगने,
शब्द खंजर से लेकर कल जो आए थे पास मेरे,
कहा तो होता कि आए हैं मेरा प्राण मांगने,

कलेजे को पसलियों से छिपा रखा था मैंने,
मैं खुद भूल गया था कि कहाँ रखा था मैंने,
क्या खूब निशाना लगाया दिल तोड़ने वाले ने,
उसे बताया भी नहीं था कि वहाँ रखा था मैंने,

तुझे हक़ दिया है तो तू कर हंसी मज़ाक मुझसे,
तू मेरा दोस्त है न, तू बातें कर बेबाक मुझसे,
मुझे मार मेरी गलतियों पर या समझाओ तुम,
तेरी मर्ज़ी है तू चाहे तो हो जा नाराज़ मुझसे,

मुझे याद रहता है इतना हक़ मैंने किसे दी है,
उसे तो बिलकुल नहीं दी जो कल ही की है,
और जिसे जानता भी नहीं उसे कैसे दे दिया,
ये हक़ मांगे मुझसे फिर चाहे वो कोई भी है,

मैं ज़रा सलीके से पेश आता हूँ अनजानों से,
भले थोड़ी विनम्रता कम हो जाती है मेहमानों से,
जो भूले हुए या पुराने लोग हैं, अनजान तो नहीं,
हाँ पर कुछ खास रिश्ता नहीं मेरा दिवानों से,

भूले-बिसरे हो तो तुम मुझसे तू-तड़ाक कर लो,
मुझसे पुछो मैं कौन हूँ, मेरी आवाज़ याद कर लो,
अगर ये irritating है तो मुझे Black Listed करो,
मेरा नंबर search करो, उसके बाद बात कर लो,

लोग बड़े उम्मीद से Dial करते हैं नंबर पुराने
या तुम्हारा हाल जानना चाहते हों किसी के बहाने,
लेकिन कई बार तो नंबर बदल चुका होता है,
कभी लोग जान-बुझ कर बन जाते हैं अनजाने,

ऐसी भी बातें होती हैं, जो तुम न चाहो,
हमेशा वही फोन नहीं करता, जिसे पहचानो,
वो Wrong Number है या Right किसे पता,
उससे बात करो, उसके मकसद को जानो,

तुम कह देते बाद में करो, गर Frustrated हो,
गुस्सा हो लो, अगर किसी के लिए Awaited हो,
Call You Later का Reply दे दो, अगर Busy हो,
Clarification दे दो, जो लोगों से Irritated हो,

मैंने कोई बदतमीजी नहीं की जो तुम गाली दो,
ऐसा नहीं कि तुमने मुझसे पूछा हो, मैंने टाली हो,
कोई scheme नहीं बताई, न तुम्हारे Ex की बात की,
तुम याद करो, कोई ऐसी चीज़ जो मैंने मांगी हो,

मुझे उसका बुरा लग जाता है जो मैंने नहीं किया,
मीठे बोल की उम्मीद थी, क्या गलती वही किया,
तुमने गाली दी, तो मतलब गाली दी, चाहे किसी को,
तुम सोचते रहना तुमने गलत किया या सही किया,

तुम्हें कैसे पता मैं अनजाना हूँ, बदतमीज़ हूँ,
हो सकता था मैं दूर का रिश्तेदार हूँ, अजीज हूँ,
मैं नहीं जानता तुम कैसे React करते मेरी गाली का,
तुम Independent हो पर मैं स्थिर हूँ, दहलीज हूँ,

नाली अपनी हो या मोहल्ले की, नाली होती है,
आँख भर भी आए तब भी थोड़ी खाली होती है,
तुझे तेरी आदत, तेरी समझदारी मुबारक हो,
गाली आधी अधूरी हो तब भी वो गाली होती है,

अब क्या Sorry और Please don't mind लगाया है,
मैं देख चुका तुम्हारा चेहरा, जो तुम्ही ने दिखाया है,
इन बातों से अब मुझे कोई असर नहीं होता है,
दुख है, मेरे स्वाभिमान ने मुझे ये नहीं सिखाया है,

मैं किसी से भी उम्मीद लगातार नहीं करता,
इसीलिए सिर्फ Crush रखता हूँ, प्यार नहीं करता,
मुझे जब बुरा लगना होता है, लग जाता है,
फिर किसी के Sorry का इंतज़ार नहीं करता.


किसी को कुछ बोलने से पहले सोच लेना चाहिए, कई बार Wrong Number भी Right Number होते हैं.
कैसी लगी ये कविता, कमेंट करो यार, और मेरे Facebook page पर like करो.

Think what if people make mistakes and ask you not to mind it. I ask you not to mind and abuse you Madhar***. Won't you mind that? How is that possible. Also we have our self-respect, and we are responsible to that. If we don't mind to such mistakes, our self-respect will mind it. Don't flow in emotions all the time. The right is right, and the wrong is wrong all the time. No matter that is done mistakenly and unwillingly. May be the person, who has done the wrong, is right. So, don't be angry with him/her.
Text me in comment box, if any confusion or complication.

Social Media पर Follow करो,
Kalamwali
Subscribe on my YouTube Channel

Monday, 13 January 2020

इश्क़ और ठंढ.....

Fog and Smog
ये कोई कविता नहीं है, बस मन में आने वाला एक खयाल है, जिसे ज्यों का त्यों लिख दिया है।

मैं चलता जा रहा हूँ। सोचता हूँ कभी कभी, किसी किसी बात को। मुझे नहीं पता ये सबकुछ क्या चल रहा है। कभी कभी खुद में ही सरकार की नीतियों और विपक्ष के मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। लेकिन ये सब कुछ सिर्फ एक कोशिश मात्र है। मुझे पता है कि इसका कुछ होने वाला नहीं है। और मुझे ये भी पता है कि अगर कोई राजनीतिक दल अच्छा नहीं भी है तब भी हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, उसे बदलने का, या फिर उसे सुधारने का।

गाड़ी से चलने पर सड़कों की खराबी समझ में आती है। लेकिन पैदल चलने का एक अपना ही अंदाज़ है। सड़क पर बने हुए गड्ढे, और उन गड्ढों से निकली हुई एक छोटी सी पत्थर, जिसे पैरों से ठोकर मारते मारते कब आप सामने से आने वाले गाड़ी के करीब पहुँच जाते है पता नहीं चलता है। मौसम अगर ठंढ का हो तो मज़ा कुछ ज़्यादा ही हो जाता है। क्योंकि तब आपके पैरों में जुतें होते है, जो पत्थर को ठोकर मारना और आसान बना देती है।

ऐसे ही मैं भी आज जा रहा था। पैदल चल रहा था, कुछ सोचते हुए। फिर मेरे मन में चल रहा कोई सामाजिक मुद्दा जाने कब गीत में बदल गया पता ही नहीं चला। हैरान तो मैं तब हुआ जब मुझे ये एहसास हुआ कि मैं एक अंग्रेजी गाना गुनगुना रहा था।

मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं पहुंचा कहाँ तक हूँ। मोबाइल निकाल कर अपना location देखने का भी मन नहीं कर रहा था। हाथ को जैकेट के जेब में छिपा कर रखा था। कोई अंग्रेजी, या शायद कोई राहत फतेह आली ख़ान का कोई गीत गुनगुना रहा था। वजह ये थी कि शायद गीत गुनगुनाने से ठंढ का एहसास कम होता है। पर अगर ठंढ से इतना ही दिक्कत है तो घर से निकलने की ही क्या ज़रूरत थी, ये मैं समझ रहा था।

वो कहते हैं न, कि जो होनी होती है, वो होकर ही रहती है। कुछ ऐसा ही था मेरे साथ भी। उस दिन चलते-चलते मेरे सामने अचानक से वो प्रकट हो गयी। मैंने ज़रा गौर से उसके चेहरे को देखा। अरे, ये तो वही चेहरा था, जिसे मैं हमेशा देखना चाहता हूँ। कई बार मैंने कोशिश की कि उस चेहरे को अपनी आँखों में बसा लूँ, ताकि उसे देखने की बेचैनी ख़तम हो जाए। लेकिन इन आँखों में तो आँसू भी नहीं आते, फिर उसके चेहरे की तस्वीर तो बहुत बड़ी बात हो जाती है।

कई बार मैं सोचता हूँ, ये इश्क़ होता ही क्यों है। लेकिन फिर मैं सोचता हूँ, मुझे क्या है, मुझे तो इश्क़ हुआ ही नहीं है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि कभी होगा भी नहीं। हो भी सकता है कि चलते- चलते किसी मोड पर कभी इश्क़ हो जाए। वो जैसे फिल्मों में होता है न- LOVE AT FIRST SIGHT, वैसा वाला। और ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि मेरी तो एक Crush भी है। Crush तो समझते हो न?

आओ, पहले Crush ही समझा दूँ। Crush वो होता है जिसे आप प्यार नहीं करते, और न ही वो आपको प्यार करता है। मतलब हो भी सकता है कि वो आपको प्यार करता हो, लेकिन आपको ये बात पता नहीं है। यहाँ तक कि आप ये पता भी नहीं करना चाहते कि वो आपसे प्यार करता है कि नहीं, और आप अपने प्यार का इजहार भी नहीं कर पा रहे हैं। ये वो है, जिसके पास आने पर आपकी धड़कने तेज़ हो जाती हैं, घबराहट, शर्माहट, हिचकिचाहट, और सारे आहट महसूस होने लगते हैं। आप उससे बात करना चाहते हैं, लेकिन उसके पास भी नहीं जा पाते। आप उसको खुश रखना भी नहीं चाहते और परेशान भी नहीं देख सकते। Crush मतलब वो, जिसके लिए आप पढ़ने जाते हो, लेकिन पढ़ नहीं पाते। जिसे सामने बैठा कर सिर्फ देखते रहना चाहते हो, लेकिन उससे नज़र भी नहीं मिला पाते। ऐसी बहुत सी चीजे हैं, जिससे आपको लगता है कि आपका किसी पर Crush है।

Crush तो मेरी भी है। ये Crush ही तो है, जो अभी अभी दिखी है। हर बार सोचता हूँ, जी भर कर देख लूँ। देख लूँ ताकि इस चेहरे को अपनी आँखों मे बसा सकूँ। आँखों में बसा सकूँ ताकि अगली बार उसे देखने की बेचैनी न रहे। लेकिन इन आँखों में तो इतनी भी जगह नहीं है कि इनमें आँसू आ सके। मैंने अपना फोन निकाला। अभी कुछ देर पहले मैंने अपना लोकेशन देखने के लिए अपना फोन नहीं निकाला था। मुझे ठंढ लग रहा था। लेकिन अभी Crush की तस्वीर लेने के लिए मैंने फोन निकाला। सोचा, चलो आँखों में न सही, फोन में ही उसकी तस्वीर कैद कर लेता हूँ।

जैसे ही मैंने camera को on किया, उधर से Pop-Up आया, No enough space in memory. हाँ, याद आया। कुछ दोस्तों की यादें हैं, memory में। मैंने फोन का storage देखा। मेरे फोन में तो 0 KB जगह बची थी। और crush की तस्वीर कम से कम 1.5 MB का होगा। मैंने सोचा दोस्तों की यादों को memory से बाहर कर देता हूँ। लेकिन फिर सोचा- एक लड़की के लिए? और वो भी ऐसी लड़की, जिसका नाम भी नहीं पता मुझे, जबकि लगातार 6 साल से उस एक चेहरे की जगह कोई दूसरा चेहरा नहीं ले पाया है। इतने में तो लोगों के बीच S** और Break-Up भी हो जाता है।

मैं सोचता हूँ अगर कभी वो मेरे बारे में सोचती होगी तो क्या? यही न कि मैं फटटू, डरपोक, बुजदिल हूँ। क्योंकि उसे थोड़े पता है कि मुझे कभी बोलना ही नहीं है। लेकिन फिर सोचता हूँ, क्या वो मेरे बारे में सोचती भी होगी?
थोड़ा अजीब है, लेकिन सच है।

दोस्त तो ज़िंदगी की एक अटूट कड़ी होते हैं। उनकी ही यादें मिटा दूँ मैं? लेकिन यादें तो मैं फिर से भी बना सकता हूँ। लेकिन फिर से यादें बनाने के लिए इसका चेहरा memory से हटाना पड़ेगा। अजीब असमंजस है। एक तरफ दोस्त हैं, दूसरी तरफ Crush है। लेकिन किसी ने कहा है- जो मिलता है उसे रख लेना चाहिए। चलो, दोस्तों के साथ जो भी यादें है, या तो उन्हे मिटा दो या फिर छोटा कर दो। लेकिन Crush की तस्वीर तो चाहिए। क्योंकि बार बार उसे कहाँ-कहाँ ढूँढता रहूँगा मैं। फोन में अगर उसकी तस्वीर आ जाए तो क्या बात है। दोस्तों से कह भी तो पाऊँगा- ये तुमलोगों की भाभी है।

क्या ये बदनाम करना नहीं होगा? अच्छा दोस्तों से नहीं कहूँगा। मेरे इश्क़ को गुमनाम ही रहने दूंगा मैं। Feeling क्या होता है? तुम उसका पता बता दो तो मैं उसकी शादी के दिन उसकी बारात में जाकर खाना भी खा सकता हूँ। ये कोई बड़ी बात नहीं है। यहाँ तक कि बिना कुछ महसूस किए उसका जयमाला का स्टेज भी सजा सकता हूँ।

लेकिन मुझे तब भी उसकी एक तस्वीर लेनी है। चलो, उसकी तस्वीर लेने के लिए दोस्तों की यादों को नहीं मिटाऊंगा, भले खुद को ही खोना पड़े। लेकिन वो गयी कहाँ !!!!!!!!!!!!!!!?????

इतनी देर से जो मैं सोच रहा था, क्या वो सब एक ख़याल था? क्या वो एक सपना था? नहीं, चल तो रहा था मैं। सड़क पर पड़े एक पत्थर को ठोकर भी मार रहा था। क्या ये सब झूठ है? क्या वो मुझे दिखी भी थी?
मैंने खुद को एक झापड़ लगाया। चोट लगता है, इसका मतलब ये सब हक़ीक़त है, कोई सपना, कोई ख़याल नहीं है। मैं रुक कर सोच रहा था, उस चेहरे को फिर से देखना पड़ेगा। इस बार भी मैंने उसे बढ़िया से नहीं देखा।

मैं एक तरफ थोड़ा तेज़ी से भागा। इस उम्मीद में कि शायद वो फिर से दिख जाए। कुछ कहना नहीं है, बस एक आखिरी बार देखना है। या फिर उसकी तस्वीर लेनी है, ताकि दुबारा जब भी उसे देखने का मन करे तो देख सकूँ। माँ जब पूछे कि कैसी लड़की चाहिए तो दिखा सकूँ। जब कभी कोई Drawing बनाने का मन करे, तो उसकी तस्वीर बना सकूँ। लेकीन वो नहीं दिखी। अबकी बार मैं दूसरी तरफ भागा, फिर से उसी उम्मीद में। लेकिन वो फिर भी नहीं दिखी। मैं खड़ा हो गया, अब मुझे ये नहीं पता चल रहा था कि मुझे किधर जाना है और मैं आया किधर से था। मुझे उस दिन अपना location देख लेना चाहिए था !!!!!!!!!!

"सिर्फ बनारस की गलियों में ही नहीं जनाब, इश्क़ अक्सर कुहासा में भी खो जाता है।"

Saturday, 25 May 2019

नमकीन इश्क़

The title is now changed from KIS-LIYE to NAMKEEN ISHQ.

क्लास में बैठ कर बहुत पहले से, एक एक सेकंड मेरा इंतज़ार करती थी वो,
मुझे एहसास नहीं हुआ कभी कि मन ही मन मुझसे प्यार करती थी वो,
मेरे दोस्त मेरा नाम ज़रा ज़ोर से लिया करते थे उसके आसपास होने पर,
कभी चिढ़ती थी तो कभी न मुस्कुराने की कोशिश हर बार करती थी वो,

उसे लगा था कि मैं शायद समझ जाऊंगा उसके एकतरफा प्यार को,
ये जानकर कि एक पागल से मोहब्बत की थी उसने पागलों कि तरह,
और भाई हम एक तो इश्क़ से अनजान थे, दूसरे इश्क़ से खफा भी थे,
हम तो अकेले ही ठीक हुआ करते थे, घूमते बरसते बादलों की तरह,

मैंने खुद को बचाए रखा था, उसके इश्क़ से भी, उसके हुस्न से भी,
मगर पिघल गया उसकी आँखों में, उम्मीद और मोहब्बत देखकर,
लेकिन मेरा पिघलना भी पिघलना नहीं बल्कि मेरा बदलना जाना था,
आखिर उसे शब्द देने पड़े थे मेरी नासमझी और मेरा शराफत देखकर,

हाये रे उसकी हल्की भूरी आंखे, हाये रे उसके भूरे भूरे से बाल,
उसके सुर्ख़ होंठ और होंठ के ऊपर एक छोटी सी प्यारी सी नाक,
उसने कोई nosepin नहीं लगाए थे उस दिन शायद या मुझे याद नहीं,
उसका इस कदर सुंदर होना हम सब के  लिए था एक इत्तिफाक़,

कहते हैं कि जो आया है वो एक दिन जाएगा ही, ये नियम है दुनिया का,
वो चली तो गयी मगर खुद को मेरे भीतर छोड़ गयी थी जाते हुए,
एक पागल सा जिसने formality के लिए भी रुकने को नहीं कहा,
एक बहादुर सी वो, जिसने दिल की बात कह दी थी घबराते हुए,

उसकी बेअसर मोहब्बत ने उसके जाने के बाद असर किया था मुझपे,
वो सब अब महसूस हो रहा था, जो कभी नहीं हुआ था उसकी संगत से,
मुसकुराता चेहरा से लेकर उसकी भिंगी हुई आंखे भी याद आती थी,
ये मोहब्बत है जनाब जिसने किसी को नहीं छोड़ा है अपनी रंगत से,

तुमने तो तुम्हारी हिस्से की मोहब्बत भी अभी पूरी नहीं करी है,
अभी तो मेरे हिस्से की पूरी की पूरी मोहब्बत करनी बाकी है,
मुझे लगता है तुम्हें वापस आना चाहिए हमारे नमकीन इश्क़ के लिए,
अभी तो तुम्हें मुझसे और मुझे तुमसे शिकायत करनी बाकी है. 

Monday, 15 April 2019

ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,........

life, love, friends
A photo which shows two different faces of life..........

ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो, ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,
कोई कविता सी हो, अपने लफ्जों में यादों का सागर समेटे हुए,
या किसी शायर की ज़िंदगी से जुड़ी खूबसूरत कोई कहानी हो,
ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,........

तुम नीरस हो, तुम सरस हो, तुम ज़हमत हो, तुम सरल हो,
कुछ लोगो ने तुम्हें खुशहाली कहा, तो कुछ तुम्हें गमगीन कह गए,
जब आसरा छोड़ मुस्कुराहट का, तेरी दहलीज़ से उठने हो हुए,
कमाल के लोगों से मिलाया तूने, जो मेरी ज़िंदगी को हसीन कर गए,
ऐ ज़िंदगी जाने क्यू कई दफा, तुम मेरी होकर भी अनजानी हो,
ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,............

बड़ा जद्दो जेहत भरा है उर्दू के अल्फ़ाज़ों से मुखातिब होना,
तुम्हारी रहमत में हमने देखि है महफिल-ए-मुशायरा भी,
ग़ज़लों के ये बेबाक से नज़्म, बड़े गुस्ताख़ हो गए है मुझसे,
इनसे रूबरू होते ही अब मैं भूल जाता हूँ अपना दायरा भी,
इतने अनुभव देने वाली तुम, किसी खुदा की मेहरबानी हो,
ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,............

जो दोस्त तुमने दिये है मूझे, जब उनसे रिश्ता तोड़ना चाहा था,
ऐ ज़िंदगी तुझे बुरा नहीं लगा, जब किसी और को ज़िंदगी माना था,
तेरे कंधे को जब भिगोया था मैंने, तेरे ही दिए आंसुओं से,
तेरी बेरुखी पर मुझको रोना था, तेरी मासूमियत पर मुसकुराना था,
वो किसी खास शख्स की धुंधली तस्वीर जैसी, याद कोई पुरानी हो,
ऐ ज़िंदगी तुम कितनी सयानी हो,........


_____________________________________________
For my social media profiles, click on them respectively:-

Sunday, 27 January 2019

Friendzoned v/s Single....

This is an art of Shashikant Sharma. When not found a suitable cover for my poem, just drawn it.

जब उसने पहली बार एंट्री ली, वो पल बहुत ही ब्यूटीफुल था,
तुम बात करने के मौके ढूंढ रहे थे, मैं निहारने में मसगुल था,
यूँ तो हम दोनों ही उसके आशिक़ है, जिसे वो नहीं जानती,
तुम करीब होने के बाद भी अगर दूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

हम दोनों चाहते है उसको, कि वो रोज पढ़ने के लिए आये,
हम चाहते हैं कि अंताक्षरी हो, और वो कोई गीत सुनाए,
मैं चाहता हूँ वो पैदल घर जाए, ताकि पूरे रास्ते उसे देख सकूं,
तुम खुद की बाइक पर उससे दूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

कही भी चले जाते हो अगर तुम, उसके ज़रा सी बुलाने पर,
मैसेज करते हो जाने कितने, उसके ऑनलाइन आने पर,
मेरे तो न कांटेक्ट लिस्ट में है वो, ना फ्रेंड लिस्ट में ही है,
छोटी बातों के लिए भी उसके मुखबिर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

तुम हर बार हँसा सकते हो उसको, अपने फालतू जोक्स सुनाके,
मैंने तो उसे देखा भी नही है कभी, नज़रो से नज़र मिलाके,
वो रो कर तुम्हे गले लगा ले, तो मुझे उसके आंसू दिखते है,
उसका टच पाकर तुम खुशी में चूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा हमें, दुगना खुश कर जाती है,
उसके आंसुओ की वजह तो वो, खुद रोकर तुम्हे सुनाती है,
मुझे तो उसके मायूस चेहरे की वजह भी पता नहीं चलती,
तुम सबकुछ सुनकर भी मजबूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसके आंखों की चमक को, मैं हर पल ही एहसास करता हूँ,
तुम बात कर लेते हो उससे, मैं उसके hi को ही याद करता हूँ,
मैं अनजान हूँ पर तुम जानते हो, वो किसी और पे मरती है,
*As a friend* अगर तुम मशहूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसे कैसा लड़का चाहिए ये बात, उसने तुम्हे कभी बताया है,
तुम्हारे भीतर वैसा ही बनने का, वाहियात सा खयाल आया है,
मैं जैसा हूँ कोई वैसे ही क़बूल कर ले मुझे, तो क्या बात,
और तुम्हारा प्रपोजल उसे नामंजूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

This also is an art of mine. Shown through this pictire how a single guy looks at his crush.
_____________________________________________
For my social media profiles, click on them respectively:-

Thursday, 10 January 2019

Me and She.....

Check out my audio below. But this will soon be replaced with a video of the same poem, with my face.


मैं उस रोज़ अपने मोड़ से बस में चढ़ा, वो मेरी क्लास का पहला दिन था,
सीट पर बैठने के बाद फ़ोन निकाल कर, मैं गाना सुनने में लीन था,
कि गाड़ी उसके मोड़ पर पहुंच गयी जाने कब, मुझे तो पता भी न चला,
और वो जिसने दरवाजे से entry ली, उसका चेहरा बड़ा ही हसीन था.
------------------------------------------------------------------------------------------
उसे देखते ही मैंने खुद को चुपचाप, अपनी सीट से खड़ा कर लिया था,
ये पहली बार था शायद जब उसको, किसी नई अपना सीट दिया था,
किसी को ये मेरा चीप बेहवीयर लगा, तो किसी को अच्छा भी लगा था,
पर चलो मुझे खुद से तसल्ली थी कि मैंने, कुछ तो अच्छा किया था.
-------------------------------------------------------------------------------------------
फिर चुप चाप सी वो, चुप चाप से मैं, उतरे एक ही जगह पर हो गए दो ओर,
रिटर्न में वो पहले से ही बस में थी, मैंने भी पकड़ लिया सीट का दूसरा छोर,
अगले दिन जैसे ही वो अंदर आयी, मैं फिर अपने सीट से खड़ा हो गया,
कि तभी मेरी सीट पर एक आंटी बैठ गयीं, और वो बैठी जाके कहीं और.
------------------------------------------------------------------------------------------
निकलता टाइम पर ही था, भले ही मैं जल्दी तैयार हो जाया करता था,
शायद उसी के लिए ही ठंढी में भी, मैं हर रोज़ नहाया करता था,
वो जो चिढ़ता था बहुत, किसी भी परफ्यूम के बेकार सी स्मेल से,
अब क्लोज अप से ब्रश भी करता, और सेट वेट भी लगाया करता था.
------------------------------------------------------------------------------------------
उससे बस दोस्ती करने के लिए ही मैंने, हैप्पन पर एकाउंट बनाया था,
लेकिन इंस्टा और फेसबुक पर भी उसको, मैं नही ढूंढ पाया था,
नज़रे बचा कर चोरी छिपे कभी कभार, बस उसके दीदार हो पाते थे,
और तकलीफ तो ये थी की एक रात भी, उसका सपना तक नही आया था.
------------------------------------------------------------------------------------------
हर बार सीट खाली क्यो मिलती थी इसका, उसे नहीं हुआ एहसास भी,
दोस्ती तो दूर, उसने देखा भी नहीं मुझे, इतने दिन मिलने के बाद भी,
समीज-सलवार पहनी हुई साधारण सी, वो बहुत प्यारी लगती थी,
मुझे याद है मैंने अपनी डायरी में लिखा है, उससे जुड़ी एक याद भी.
------------------------------------------------------------------------------------------
वो लड़की अकेली कहाँ रहती, कहीं भेजा नहीं उसे बस यही सोचकर,
ये समाज जानवरो से भरा पड़ा है, जो रख देंगे उसके कपड़े नोचकर,
ये ज़ख्म बड़े गहरे दे डालते हैं, बस हल्के से ही बदन को खरोंचकर,
तुम बोल नहीं पाओगे की कोई सुने, सब रख देंगे तुम्हें दबोचकर.
------------------------------------------------------------------------------------------
पर मैं तो लड़का था इसलिए मैंने, एक बढ़िया सा रूम ले लिया साल में,
रोज़ बस की भीड़ में अप-डाउन करना, मुझे पसंद नहीं था किसी हाल में,
इसलिए यही रहना डिसाइड किया, अपने दिल के साथ सैक्रिफाइस करके,
और उसके चेहरे की तस्वीर रख ली मैंने, दिल के किसी safe wall में.
------------------------------------------------------------------------------------------
मुझे याद आता है वो तारीख, जिस दिन मुझे रूम पर रहने आना था,
मेरी निगाहें दरवाजे पर ही टिकी थी, उसका चेहरा जो मन में बसाना था,
उसकी एंट्री भी ज़बरदस्त थी, उस दिन काफी सुंदर दिख रही थी वो,
एक तो पिछली रात उसका बर्थडे था, दूसरे एग्जाम देने जाना था.
------------------------------------------------------------------------------------------
उसके पापा ने नोकिया 1200 फ़ोन, बनवा कर दिया उसको गिफ्ट में,
वहीं जो कभी टूट गया था उनसे, किसी बड़े से होटल के लिफ्ट में,
वो अपने दोस्त से कह रही थी कि, उस दिन वो लेट हो जाएगी,
उसका एग्जाम था शायद बीए का, और वो भी सेकंड शिफ्ट में.
------------------------------------------------------------------------------------------
फिर ना हम कभी मिले किसी मोड़ पर, और ना ही हुई हमारी कोई बात,
कुछ इसी तरह से होना लिखा था, मेरी एक नई ज़िंदगी की शुरुआत,
फिर दो-ढाई महीनों के बाद जब मैं गाँव जाकर वापस आ रहा था,
कंडक्टर पूछा हमने आना-जाना, क्यो छोड़ दिया एक साथ.
------------------------------------------------------------------------------------------
मैं हैरान था कि उसके पिता, उसके बाहर रहने के लिए कैसे मान गए,
हो सकता है आने जाने की समस्या को, अब वो भी ठीक से जान गए,
वो पहला दिन था मेरे लिए जिस दिन, मैंने अपना सीट नहीं छोड़ा था,
और उसी दिन से उसको देखने के, मेरे भीतर से सारे अरमान गए.
------------------------------------------------------------------------------------------
एक लड़का बता रहा था उसके गांव का, कि वो बिचारी अब रही नहीं,
उस दिन एग्जाम से आते देरी हो गयी, परिंदा भी दिख रहा था कही नहीं,
परिंदे तो चलो घर लौट जाते है शाम को, पर दरिंदे शिकार ढूंढते रहते है,
4 दरिंदो ने मिलकर उसपर ज़ुल्म किया, उस दर्द को वो और सही नही.
------------------------------------------------------------------------------------------
बाप ने कोई कंप्लेन नहीं किया, न्यूज़ और थाना में एक्सपोज़ होने के डर से,
पर वो दरिंदे सरेआम घूमते दिख जाते है, कभी अपाचे तो कभी पल्सर से,
उन लड़को ने सलाह दिया था, अगर कंप्लेन की तो तेरी एक और बेटी है,
उसकी बहन ने भी पांचवी से पढ़ाई छोड़ दी, निकलती नही वो भी घर से.
------------------------------------------------------------------------------------------
जिसे कंडक्टर ने भाड़ा के लिए डांटा था, सिसकी नहीं सीधा रो गयी थी,
जो पुरानी फ़ोन को भी गिफ्ट में पाकर, बहुत ही ज़्यादा खुश हो गयी थी,
मेरी दोस्त जैसी वो जिसे देखा करता था, अब जाने कहाँ गुम हो गयी थी,
शायद दरिंदगी के बाहर दूसरी दुनिया में, अब चैन की नींद वो सो गयी थी.
------------------------------------------------------------------------------------------
____________________________________________________________
अब से मैं यही रहता हूँ, और कभी अगर घर जाना होता है तो ट्रैन से जाता हूँ. और किसी भी लड़की की तरफ देखता भी नहीं हूँ. भगवान ना करे, पर अगर उसके साथ भी कुछ हो गया तो?
बहुत बहुत धन्यवाद


For my social media profiles, click on them respectively:-

Monday, 31 December 2018

And We Never Met.......

Just a poem. Nothing else than just words.
Just an art of mine.
I want assure that this poem is never about me. So, after reading this out, please don't mean something.

She was neither one of my friends, nor village mate,

She did not belong to my relatives. We met in class debate,

And once she told me that she would meet me again,

But a long time has passed, and she never met.


I shaw her for the first time walking fast on a street,

That was the first time, I felt my regular  heart-beat,

She crossed me slightly, and I remained looking at her,

Later I found that she was nobody but my classmate

But a long time has passed and she never met.


I attended every single class of mine, did not bunk,

I was completely in sense, not I was drunk,

when I decided to compete myself against her,

After all she was my competitor, being a classmate,

But a long time has passed and she never met.


The way she used to smile, the way she used to laugh,

Her angry look also was awesome, I can't explain even half,

I could not see moody expression on her beautiful face,

So, in making jokes for her smile, I never got a little late,

But a long time has passed and she never met.


She was right often on some topic, while class lecture,

She was good in drawing chemistry atomic structure,

To prove her wrong, I had an arguement with teacher very often,

I have been punished many times to be out of gate,

But a long time has passed and she never met.


We became friends, who teased each other for no reason,

We were Love birds in different angles and many vision,

We did not share our notes and discussions in class,

Her beautiful handwriting is not recognised to me as yet,

But a long time has passed and she never met.


I did never because of my attitude, but she said- You're right.

That was what my friends used to address as Love Fight,

She was sharp mind, but did not result better than me,

My belief was in doings and that of her was in Fate,

But a long time has passed and she never met.


Even after her no attitude, I named her miss attitude,

Her treat for everyone was soft, I treated them rude,

She was going good for her wills, dreams and goals,

She adviced me doing the same and move on to life set,

But a long  time has passed and she never met.


I want meet her last time, to say I was not waiting for her,

That all, she told me are enough for me to take care,

I want to say, I just miss those days when she was in my life,

I know to take any decision, it has been so late,

But a long time has passed and she never met.


For my social media profiles, click on them respectively:-

Friday, 28 December 2018

तुम.....

Love Proposal
A screenshot from my favorite song that days MUJHE KAISE PATA NA CHALA.
सच बदनाम और झूठ उदास कर देती है उसको,
हाँ ये अलग बात है कि वो इससे अनजान है,
ये credit ने महफिलों से दूर कर दिया मुझे,
उदास/बदनाम कैसे करू, आखिर मेरी जान है.
-----------------------------------------------------------
उसे खुशी थी कि क़बूल हो गयी थी दुआ उसकी,
हसरत थी मुझे अपने दिल की feeling बताने की,
बड़ी तसल्ली थी मुझे मैंने उससे इजहार कर दिया,
उसने दुआ कि थी मेरे वहां से खामोश चले जाने की.
-----------------------------------------------------------
सुना है पड़ोसियों में अक्सर कमियां दिख जाती है,
या इसे बहाना कहलो मेरे डर, nature, नसीब से,
जब जब उसे देखा है, क्या ग़ज़ब की लगती है वो,
हां ये और बात है उसे कभी नही देखा नज़दीक से.
-----------------------------------------------------------
उसकी दी हुई smile का एक कतरा भी नहीं बचा,
किसी ने किश्तों में छीन लिया उसकी यादें देकर,
अब उसको सोच कर उदास हो जाता हूँ जाने क्यों,
वो जो पहले मुस्कुरा उठता था उसका नाम सुनकर.
________________________________________

Let's see who is that girl.....
Some words about her.
_________________________
तुम गर्मी की सुबह हो, जो आने से पहले ही अक्सर गायब हो जाया करती है,
तुम जाड़े की शीतलता हो, जो अच्छी लगती है पर सेहत के लिए अच्छी नहीं,
तुम बारिश हो तूफान भरी, कही बहुत ज़्यादा हो, कही बिल्कुल ही नही हो,
तुम्हारे भीतर बसंत की बहार भी देखता हूँ, पर वो शायद उतनी सच्ची नहीं.
_________________________
किसी ने जानबूझ कर block कर दिया है, उससे आने वाली मैसेज हो तुम,
जिसने मेरा नंबर ना save किया न याद, तुम उसका आने वाला call हो,
तुम वो perfume हो जिससे कोई मेरे करीब नही आता, पर कोई बात नहीं,
तुम्हारे रहते किसी की entry नहीं दिल में, तुम इसकी protection wall हो.
_________________________
तुम वो एकलौती हो, जिसे मैं मेरी कह सकता हूँ, पर उसपर मेरा हक़ नहीं,
एक सपना हो तुम कोई बुरा सा, ना पूरा याद हो, ना ठीक से भुला हूँ मैं,
किसी और के दर्द की तरह हो तुम, चाहता हूँ अपना लूं पर हो नही पाता,
तुम मेरी सोच से ऊपर हो निस्संदेह, क्योंकि विचारों से एकदम खुला हूँ मैं.
_________________________
सबसे छिपा कर बड़े प्यार से सहेज कर रखा था जिसे, वो गुलाब का फूल हो,
अब तुममे वो बात नही, वो सुगंध नही, वो खूबसूरती नहीं जो चाहिए थी मुझे,
तुम्हे अपनाना थोड़ा से थोड़ा ज़्यादा मुश्किल है, मुझ जैसे सभी के लिए,
बस तुमसे जुड़ी वो सारी यादें फिर से ताज़ा हो जाती है, जब भी देखता हूँ तुझे,
_________________________
सुबह की गर्म चाय की तरह हो, करीब आकर भी लबों से दूर हो ठंढी होने तक,
तुम तो किसी चाबी जैसी हो, अक्सर ज़रूरत पड़ने पर ही गुम हो जाती हो,
तुम कोई कीमती कलम हो, जिससे लिखना नहीं चाहता कि खत्म हो जाएगी,
तुम balcony से लगा मेरा favorite कमरा, जो मेरी ArtRoom हो जाती है.
_________________________
कुल मिलाकर I Love You. But तुम्हारे होने ना होने से कोई फर्क नही पड़ता मुझे.
____________________
For my social media profiles, click on them respectively:-

Thursday, 13 December 2018

Dear Future Wife...

किसी के future wife के लिए एक proposal और कुछ नहीं. इसे मेरे लिए मत समझ लेना 

Dear future wife,

     देखो ना, तुम्हारे लिए कितना मेहनत कर रहा हूँ. तुम्हारे पापा को चाहिए सरकारी नौकरी करने वाला दामाद. वही बनने की कोशिश कर रहा हूँ. ताकि तुम्हे खुश रख सकूं. बदले में तुम भी मेरे परिवार में शामिल हो जाना. तुम्हे तो पता ही है, आजकल नौकरी मिलना कितना मुश्किल है. मुझे भी कोई शौक नही है नौकरी करने का. पैसे कमाना हो तो कोई भी profession करके कमा लूंगा. जैसे किसी private sector में, या अपने skill को थोड़ा और develope करके. लेकिन तुम्हारे घरवाले ना, इतने से मानेंगे नहीं. उन्हें चाहिए सरकारी नौकरी करने वाला लड़का. बस वही बन जाऊं, तो तुम्हे भी अपने परिवार का हिस्सा बना सकूं.
     चलो हम कुछ बातें रखते है, अपने future को लेकर. चलो कुछ शर्त रखते है, जो हमारे खुशी से हुए arranged marriage वाले जीवन में लागू होंगी.
तुम सुबह देर तक सो सकती हो, अगर थकान या अजीब सा कुछ महसूस हो रहा हो तो. तुम bed पर मुझसे दो कप चाय की भी उम्मीद कर सकती हो, जो मैंने बनाई हो, साथ में सुड़कने के लिए. तुम मुझे अपना best friend बनने की उम्मीद कर सकती हो, जिसपे तुम भरोसा कर सको, जिसके साथ खुलेआम कुछ भी share कर सको. तुम मुझे एक helper समझ सकती हो, जो kitchen में तुम्हारी help करे ना करे, लेकिन तुम्हारा entertainment ज़रूर कर सकता है. तुम मुझसे अपने चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान की उम्मीद कर सकती हो.
     अगर तुम्हे पसंद है, तो छोटी छोटी बातों पर Love Fight की उम्मीद कर लेना मुझसे. अगर पसंद नही हो तो मुझे एक सलाह देने वाला समझ लेना. इसका ये मतलब नही की मैं बस सलाह देता हूँ. मुझे भी किसी की ज़रूरत होती है, कुछ decisions लेने में, वहां तुम मेरा साथ दे देना.
अगर कभी हम दोनों ये decide नही कर पाए कि सही कौन है, तो हम अपने और एक दूसरे के parents से सलाह ले सकते हैं.

     Dear Future Wife,

     तुम कभी अगर सजना-संवारना तो मेरे लिए, मेरी तारीफों के लिए नहीं. हाँ, कभी कभी मैं बढ़िया बोल देता हूँ तारीफ में, इसका ये मतलब नही कि तुम उसकी आदत डाल लो. हर बार शब्द ही नहीं होते है तारीफ करने के लिए, कभी कभी नज़रों को भी पढ़ना पड़ता है. और हाँ, मैं तुम्हारे सुंदर होने की उम्मीद नही करता, तुम्हारे अच्छे होने का उम्मीद करता हूँ. तुम कम से कम अच्छी होना.
     हर weekend पर movie या किसी trip पर ले जाऊं, ये शायद possible नही हो पायेगा मुझसे. पर तुम उम्मीद कर सकती हो उस दिन को मैं बाकी के दिनों से बेहतर कर दूंगा. हर anniversary पर gift की उम्मीद ज़रूर करना, लेकिन वो expensive हो, ये उम्मीद मत करना. और हाँ, कभी कभी अगर भूल जाऊं तो याद दिला देना, रूठ मत जाना इसके लिए.
     घर के सदस्यों को उनके ओहदे के हिसाब से respect देने की उम्मीद मैं तुमसे करता हूँ, बाकी तुम खुद उतनीं समझदार होगी, ये मुझे पता है. भले मुझे ______ के पापा बोल के मत बुलाना, अगर अच्छा नही लगे तो. तुम मुझे आप बोल सकती हो, और कभी कभी तुम भी.
     मेरी हर शायरी में खुद के ज़िक्र को expect मत कर लेना, और मेरे कविता के लफ़्ज़ों को सच मत मान लेना. क्योंकि कविता में मैं वही लिखता हूँ जो लोगो को अच्छा लगे. और अच्छी लगने वाली बातें सच नही होती.
     तुम मुझपे शक कर लेना, अगर भरोसा कम पड़ने लगे तो. लेकिन शक को शक ही रहने देना, जब तक सच ना पता चले. और जब शक को यकीन में बदलने में ज़्यादा time लग जाए तो उसे भूल जाना.
     हमारे बच्चों को सिर्फ अपनी जिम्मेदारी समझने की गलती मत कर देना तुम.
     अगर घर में या रिस्तेदारों में से किसी की बात का बुरा लगे तो मैं तुमसे उम्मीद करता हूँ तुम मुझे सबकुछ सच सच बताओगी. बदले में तुम मुझसे एक सलाह या हल की उम्मीद कर लेना. अगर तुम्हे frankness पसंद है तो तुम किसी से बात कर सकती हो, अगर पसंद है तो serial भी देख लेना एक-आध.
     रोज instagram, facebook पर close-up भेजने की उम्मीद कुछ ज़्यादा मत करना मुझसे. लेकिन अगर memory ही बनानी हो तो मेरे stupid सी हरकतों को याद रख सकती हो, किसी diary में लिखकर.
     मैं गाना गा सकता हूँ, भले ही मेरी आवाज़ बेसुरी है. लेकिन नाचने की उम्मीद मत करना मुझसे. मैंने कभी अकेले में भी नही नाचा है, खुद के लिए भी नही. कविताओं के rhythm बनाने में मैं तुम्हारे help की उम्मीद करता हूँ, घर के कामो में तुम मेरे help ले लिया करना.
     हर रोज मेरे call करने का इंतेज़ार मत करना, हर वक़्त मेरे free होने की उम्मीद मत करना. लेकिन तुम भरोसा कर सकती हो कि मैं किसी भी गलत या बुरे काम में ना तो मौजूद रहूंगा, और ना ही किसी का साथ दूंगा.

Dear Future Wife,

     मुझे पता है कि तुम कही ना कही मेरे परिवार का हिस्सा बनने के लिए थोड़ा और Mature हो रही हो. कोई बात नहीं. मुझे तुम्हारे signal की ज़रूरत नहीं है. मैं भी तुम्हारे लिए struggle कर रहा हूँ. जैसे ही मेरी struggle कम हो जाए, मैं परिवार वालों, रिस्तेदारों, दोस्तो और गांव वालो को लेकर तुम्हे लेने के लिए आऊंगा. I am sorry कि तुमको कुछ दिन wait करना पड़ रहा है.
     वैसे तो और भी बहुत कुछ है, लेकिन आखिर में एक सवाल:-
     क्या तुम अपनी परेशानियां, अपने सुख, अपनी यादें, अपने smile, अपनी हंसी, अपने feelings, अपने अनुभव, अपनी जिम्मेदारियां, अपनी थकान, अपनी इच्छाएं और भी बहुत कुछ मेरे साथ share करते हुए मेरा साथ पाना चाहोगी?




For my social media profiles, click on them respectively:-
Click on above links. Tum badal gye ho bahut.



Sunday, 9 December 2018

अनजाने से अनजानों तक.....

Screenshot from my Chat History.......

हां, मुझे याद आता है अच्छे से, किसी न किसी दिन बताया था आपने,
Interest शुरू से ही मेरा ही था आपमें, ये एहसास दिलाया था आपने,
आपके number से ज़्यादा मुश्किल था, आपको message के बहाने ढूंढना,
बस थोड़े से ही पल में कुछ यूं, खुद को मेरे भीतर बसाया था आपने....
_________________________________________________________
Message की शुरआत मैंने की थी, तब आपने उसको ignore किया,
फिर खुद का intro लिखकर, आपको text मैंने once more किया,
7-8 messages के बाद कही, आपका Hi लिखकर reply आया था,
आपका reply देखकर खुशी में, मैंने 15-20 messages और किया...
_________________________________________________________
आपके हर dp पर comment किया, थोड़े से impression के लिए,
हर status का reply किया, बस थोड़ी देर conversation के लिए,
मुझे लगा था मेरी तारीफें आपको अच्छी लगती थी, पर मैं गलत था,
उतनी तारीफ तो कोई भी कर देता है, लोगों के consolation के लिए...
_________________________________________________________
फिर धीरे धीरे मेरे messages का, आपकी ओर से आने लगा reply,
तुम्हारे ही message का wait करती हूँ,- was your biggest lie,
जब आपको कोई काम नहीं होता था, आपका message आता था,
कब आपका message आ जाए इसलिए, हमेशा मैं रहता था online...
_________________________________________________________
आपने block भी किया, फिर phone करके unblock करना सीखा,
या तो इरादा था छुटकारा पाने का, या special feel कराने का तरीका,
मैं नासमझ फिर से message करने लगा, दुबारा उतनी ही खुशी से,
कुछ इस तरह कि reply में, आपका पागल हो तुम मुझे नहीं दिखा...
_________________________________________________________
एक सिलसिला चला कि charger बोर्ड में और phone हाथ में होता था,
बिना आपके Good Night और Sweet Dreams के मैं नही सोता था,
Light न हो तो brightness कम, और bettery saver को चालू करके,
कभी कभी data saver भी on करके, data और battery संजोता था...
_________________________________________________________
माँ पूछ देती है क्या बात है, मैं कोशिश करता हूँ जब काम में हाथ बटाने की,
वो पढ़ लेती है मेरी उदासी को बखूबी, जब कभी मैं सोचता हूँ मुस्कुराने की,
माँ पूछती है:- आजकल तेरी पढ़ाई phone पर क्यो नही हो रही है?
क्या कोई तरीका है शातिरों जैसा, माँ से अपनी उदासी और गम छुपाने की...
_________________________________________________________
पहले ignore करना, फिर reply फिर अपने मन से मुझको text करना,
पहले Hmmmm, फिर Okkkkk, फिर bye से see you next करना,
पहले reply भी नही आते थे, फिर message भी आने लगे आपके तो,
फिर delete for everyone, फिर गलती सुधार कर perfect करना...
_________________________________________________________
फिर से सब reverse करने में, आप ही ने तय किया है इस लंबे सफर को,
अब मेरे status बिना आपके seen के, पहुंच जाते है disappear को,
अपने मन से text तो दूर अब तो मेरे message का reply भी नही आता,
Busy लोगों से क्या बात करना- मैंने देखा नही था इस cover को...
_________________________________________________________
तुम busy रहने लगे हो- तो आपके message नही करने के बहाने हैं,
मैंने झूठ बोल दिया- हाँ, बहुत ज़्यादा*, सच से मुझे कौन सा नाम कमाने हैं,
ज़रा गौर करना मैंने आप को कही पर भी तुम नही लिखा है, गलती से भी,
क्योंकि आपकी नज़रों में तो, हम आज फिर से एक दूसरे से अनजाने हैं...
_________________________________________________________
----------------------------------------------------------------------------------------------
Just words.
A chat to remember...........
For my social media profiles, click on them respectively:-