Showing posts with label words of me. Show all posts
Showing posts with label words of me. Show all posts

Tuesday, 3 April 2018

Better out of two, Phone and Chat......


Better out of two: Phone call v/s Chatting



No Phone Call Chatting
01. We can't say him/her our internals. and if by mistake it is told, we somehow have to change the topic. We have so much time to type and erase our internals. Typing our feelings that we always wanted to tell and just erasing them is awesome feeling in itself.
02. No more time to think what to say next. Having so much time to think what to talk about next. It let us think what is proper and pleasant for him/her that couldn't hurt him/her.
03. No wait for his/her reply. Because it's a phone call. Waiting for his/her reply is most exciting feeling.
04. Quick reply after your query. Her typing duration let us guess about her reply. We guess about her/his reply of our query, what would be next in her text.
05. Just words.... Sending smilies, which best express our feelings.
06. Frankness, because we don't have such times to think about what to speak. No Frankness, because we have so much time. So this let us create some cute convo and cute words this let us think while typing. And partner is not hurt by them.
07. Partner can guess our condition by our voice and way to talk. There is no chance of it while chat.
08. If people around us see us talking to our partner over phone, they can talk about bad about you, putting some relation between you two. There is not always a chat on phone, when our display is on. It may be a movie, a song, social media news feed, or something else.
09. Convo ends with Good Night. Seeing your partner still online later after saying you Good Night is another feeling.
10. Direct hear them. Imagination of her reply in her voice and her words is such.......
No feeling is here can beat this one feeling.

Visit me on my social media handles, for more about my creations.
Social Media पर Follow करो,
Kalamwali
Subscribe on my YouTube Channel

Monday, 5 March 2018

मेरी हाथ मे वो आखिरी सिगरेट........

सिगरेट से मेरी बातचीत........... Read it out, read it loud. Credit of everything goes to Shashikant Sharma just hit on my page link here.:- https://www.facebook.com/authorShashikantSharma कल एक आदमी ने मुझे कह दिया सिगरेट खरीद कर लाने के लिए. मुझे थोड़ा सा अजीब जैसा लगा. लेकिन क्या करता, आखिर सब लोग मुझे सरीफ समझते है और मुझपर भरोसा करते है. उनका भरोसा भी तो नहीं तोड़ सकता. गया, जैसे तैसे. खरीद भी लिया, सिगरेट. सिर्फ एक ही लेनी थी. उस आदमी को भी बहुत ज्यादा बेचैनी थी. तभी तो, जब मैंने मना किया लाने से तो भी उसने मुझे जबर्दस्ती भेजा.
खैर..... अब मैं सिगरेट लेकर दुकान से निकल चूका था. मैंने एक पैनी निगाह से अपने बाएं हाथ में पड़े उस सिगरेट की तरफ देखा. जी किया मसल के रख दूँ साले को. लेकिन नहीं. अपने पैसे का ख़रीदा हुआ नहीं था. इसलिए ये नहीं कर सकता था. वरना एक दूसरा खरीद कर फिर से ले जाना पड़ता. मैंने एक तिरछी नज़र से अपने बाएं हाथ में पड़े निर्लज्ज सिगरेट की तरफ देखा. उसने भी मेरी तरफ देखा. मैंने सोचा चलो, इसे ignore करता हूँ, लेकिन नहीं, बचना भी पॉसिबल नहीं है.
घूर क्यों रहे हो? - उसने पूछा.
तो और क्या करें? तुम्हारी आरती करें?- मैंने गुस्से से कहा.
गुस्सा नहीं करते. तुम्हे मेरी कीमत नहीं पता.- उसने कहा.
गरीबो के लिए दो रूपया. इससे भी ज़्यादा होगा अमीरों के लिए. लेकिन उससे मुझे नहीं मतलब?- मैंने कहा.
दो रुपये वाले से मतलब है?- उसने पूछा.
मेरी हाथ में आया हुआ तू आखिरी सिगरेट होगा.- मैंने कहा.
सौ सौ की रही शर्त?- उसने कहा.
मैं हर उस सख्स से शर्त नहीं लगाता जिसके कल का कोई पता न हो.- मैंने कहा.
hello, लोग जब मुझे जलाते है न, तो उन्हें मेरे लाल जलते हुए भाग में उम्मीद की किरण दिखाई देती है.- उसने कहा.
हाँ, जो जलने वाले के पास आती रहती है, सिमटती हुई, बेबस- लाचार औरत की तरह. मुझे ऐसी उम्मीद नहीं चाहिए.- मैंने कहा.
तो क्या हुआ अगर वो सिमट जाता है. आजतक सपने किसके सच हुए है?- उसने पूछा.
ये बात भी सही है की सपने सच नहीं होते. तो मैं सपने ही नहीं देखूंगा. लेकिन सिमटती हुई उम्मीद मुझे पसंद नहीं.- मैंने कहा.
लोगो को सुकून मिलता है इससे.- उसने कहा.
और तुम्हे?- मैंने पूछ लिया.
मतलब?- उसने पूछा.
तुम्हे एक दर्दनाक मौत मिलती है. है न? उम्मीद की किरण जब सिमटती हुई इंसान के करीब आ जाती है तो उसे लगता है कि वो गलती कर रहा है. फिर वो उसे या तो फेंकता है या फिर अपने ही पैरों से कुचल देता है.- मैंने कहा.
सीखो मुझसे, दुसरो के लिए त्याग करना.- उसने कहा.
तुम इसी के लिए बने हो. लेकिन कैसा रहेगा अगर तुम भी सही सलामत किसी show पीस की तरह बस सामने दीखते रहो और कोई तुम्हे छुए भी नहीं? तुम भी बचे रहोगे.- मैंने पूछा.
हमें कुर्बान होना अच्छा लगता है. - उसने कहा.
हम तारीफ करते है. लेकिन उस क़ुरबानी का क्या जिसके बाद कुछ बदले ही न?- मैंने पूछा.
मतलब?- उसने पूछा.
तुम्हारे जाने के बाद आदमी किसी और को use करता है और फिर छोड़ देता है,. फिर तीसरे को, फिर चौथे को. क्या मतलब है इसका? क्या फायदा है इस क़ुरबानी का? फिर रहने देते है न इस क़ुरबानी को. क्या ज़रूरत है इसकी?- मैंने पूछा.
मुझसे लोगों की ज़रूरत पूरी होती है.- उसने कहा,
कभी कभी लोग मुझे पाने के लिए बेताब हो जाते है.
मैंने देखा. वरना आज तू मेरे हाथ में नहीं होता.- मैंने कहा.
इसके पीछे कोई comment नहीं?- उसने पूछा.
एक तू ही नहीं है उनकी ज़रूरत पूरी करने वाला. तुम्हारे जैसे कई और है. तुम्हारे बाद भी उनकी ज़रूरत खत्म नहीं हो जायेगी. उनकी ये ज़रूरत कभी खत्म नहीं होगी. हमेशा ये बनी रहेगी. और हमेशा ये तुम जैसे कईयों को जलाते रहेंगे.- मैंने कहा.
मेरी धुंआ लोगो के दिल तक पहुँचती है.- उसने कहा.
तो खुश क्यों हो?- मैंने पूछा.
मुझे सुकून मिलता है जब मैं आशिको को उनकी महबूबा की कमी महसूस नहीं होने देता.- उसने कहा.
मतलब? मैंने पूछा.
जिन्हें प्यार में धोखा मिलता है न वो अपने दिल में अपनी महबूबा की जगह मुझे रखते है. मेरे धुंए को रखते है.- उसने कहा.
सही कहा. कोने कोने में तुम तो बैठ जाते हो उनके दिल के. धुंआ जो हो. है की नहीं?- मैंने पूछा.
हाँ.- उसने कहा.
और इसके बारे में क्या, जो तुम खून की साफ सफाई में रुकावट डालते हो?- मैंने पूछा,
यार, दोस्त की तरह साथ रहो तो बढ़िया लगेगा. लेकिन तुम तो यार मतलब हद करते हो. शरीर के काम में, खून की साफ सफाई में रुकावट डालते हो. 
तो इसमें हम क्या करें?- उसने पूछा.
सही है. इसमें तुम क्या कर सकते हो. तुम तो बस दिल में घुसकर हर जगह अपना कब्ज़ा जमाओगे. और तो और साला कार्बन वाले गुण के कारण साला तुम ठीक से खत्म भी नहीं हो सकते अगर एक बार भीतर चले गये तो.- मैंने कहा.
मुझे इतनी बड़ी बड़ी बातें समझ में नहीं आती. मुझे बस इतना आता है कि मेरी वजह से suicide कम हो रहे है.- उसने कहा.
बहुत बढ़िया रक्षक का काम कर रहे हो भैया. लेकिन साला सबकी गालियाँ सुनकर, धीरे धीरे दवाई की गोलियां खाकर, हजार रोग लेकर मरने से बढ़िया है कि suicide ही कर लें.- मैंने कहा.
हद है यार, मतलब अगर तुम्हारा बस चले तो तुम तो आदमी को जीने ही नहीं दोगे?- उसने कहा.
tension लेकर जीना है तो मर जाओ साला. उससे बढ़िया कुछ नहीं है अभी.- मैंने कहा.
तो यार ये जाकर फैक्टिरियो में समझाओ न?- उसने कहा.
पहले 500-1000 का नोट लोगो ने लेना बंद किया तब जाली कंपनियों ने जाली नोट बनाने बंद किये थे.- मैंने कहा.
मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता. तुमने जितना कहा मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया.- उसने कहा.
तो ठीक है. मैंने कहा और मैंने भी उसकी ओर देखना बंद कर दिया. ..............................................................................................................................................................................................................
क्या हुआ बेटा? मेरा सिगरेट कहाँ है?- उन्होंने पूछा.
uncle ये आपके पैसे?- मैंने उन्हें अपने जेब से निकल कर 5 रुपये का सिक्का दिया.
लेकिन मैंने तो सिर्फ दो रुपये का सिक्का दिया था?- उन्होंने कहा.
हाँ अंकल लेकिन....- मैं उन्हें बताना चाहता था कि मैंने वो सिगरेट फेंक दी. लेकिन इसके पहले की मैं उन्हें कुछ बता पाता, वो खुद ही बोल पड़े.
कोई बात नहीं, मुझे अच्छा लगा कि तुमने मेरे पैसे से सिगरेट खरीद कर पि ली. अब से हम दोनों सिगरेट वाले पार्टनर रहेंगे.- उन्होंने कहा.
नहीं- मैं जोड़ से चिल्लाया. ________________________________________________________________________________________________________________________
और इसके साथ ही मैं अपने सपने से बाहर आया. वो बोले- अगर नहीं लाना है तो सीधा बोल दे, चिल्ला क्यों रहा है? .. .. .. for more, visit to the upper link or follow me on https://www.facebook.com/shashiks777