Saturday, 16 February 2019

माँ, तुम मुझसे ज़्यादा बहादुर हो.....

Brave Heart Family of a breave soldier.
तुमने मुझे पाल-पोश कर बड़ा किया, शायद अपने स्वार्थ के लिए,
कि बड़ा होकर मैं तुम्हारी सेवा करूंगा, तुम्हारे दुख में साथ रहूंगा,
लेकिन देखो ना, मैं कितना स्वार्थी निकला, जो तुम्हे छोड़ दिया,
बोल दिया मेरे वेतन से तुम घर चला लेना, मैं फ़ोन किया करूंगा.
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मैंने ज़िद करी थी जब जाने की, तुम किसी कोने में रो रही थी,
तुमने कई शहादतें देखीं हैं, इसलिए तुमने मुझे रोका था,
मैं नासमझ सा उम्र के साथ आये जोश में निकल पड़ा घर से,
तुम्हारे आशीर्वाद के लिए मेरी बीवी ने मुझे टोका था.
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माँ मैंने देखा था पापा को चाचा से बात करने में उलझे थे शायद,
माँ मैंने देखा था छुटकी को मेरे पर्स में, तुम्हारी तस्वीर छुपाते हुए,
किताबें लिए हुए पैर छुआ था जिसने मेरा, उस भाई को देखा था,
आईने में देखा था मैंने मेरी बीवी को, आँचल में आंसू बहाते हुए.
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रोहित को देखा था मैंने मेरी वर्दी में खुद की कल्पना करते हुए,
मेरी हिम्मत से बाहर था रोशनी को, मेरी पैरों से अलग करना,
मेरी टोपी जो घर आते ही मैंने तुम्हारे कमरे में रख दी थी,
मुझे देते हुए तुमने कहा था- पूरे समर्पण से देश की हिफाज़त करना.
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माँ मैं जनता हूँ पापा जानबूझकर मुझे नज़रअंदाज़ कर रहे थे,
छुटकी की शादी की कम, मेरे लौट आने की बात कर रहे थे,
तुम्हारे आंसू भी जब नही थमे तुम्हारी ममता भरी आंखों में,
तुम गइया को चारा देने चली गयी, ये तुम्हारे अंदाज़ कह रहे थे.
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माँ तुम सच में बहुत बहादुर हो, जो मेरा फ़ोन उठा लेती हो,
माँ तुम आज भी मेरे लिए स्वेटर बुनती हो, कशीदाकारी करके,
माँ मैं जानता हूँ भाई आज भी जलता होगा जब तुम नहीं देती,
अचार का वो डिब्बा, जिसमे रखा है मेरे लिए लोरी भरके..
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जब मेरे मारे जाने की खबर तुमको कोई बताता नहीं होगा,
सबसे पहले दुश्मनों से ज़्यादा घरवालों पर गुस्सा करती होगी,
खुद कलेजे फाड़ कर रोती होगी, पहले तो बहुत ही ज़्यादा,
मेरी बीवी को तुम्ही चुप करा कर, अकेले आहे भरती होगी.
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माँ मैं डर गया था यूँ मौत को अपने सामने देखकर बहुत ज़्यादा,
तुम्हारी आंख फड़फड़ाई होगी तो tv तुमने भी चालू किया होगा,
किसी न्यूज़ चैनल की आवाज़ सुनकर जब मेरी बीवी आयी होगी,
तुमने तुरंत चैनल बदलकर किसी सीरियल वाले पर किया होगा.
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मैं तुम्हे माँ नहीं कह पाऊंगा, तुम आज भी मुझे बेटा कहती होगी,
पापा खेती करके देश की सेवा करते होंगे, भाई ट्यूशन पढ़ाकर,
रोहित को गांव के सरकारी स्कूल में ही भेजती होगी तुम ना,
और रोशनी को बड़ा किया होगा मेरी बचपन की बातें सुनाकर.
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अपने छोटे बक्से से जब तुम मेरी बचपन की एल्बम निकाली होगी,
अपने भाग्य पर खुश हुई होगी, और उसी भाग्य पर रोई होगी,
दिल बहलाने के लिए मेरी बीवी का, मेरी हरकते सुनाती होगी,
कभी कभी तो मेरी बचपन की ही यादों में, बच्चों जैसी खोई होगी.
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माँ, मेरे पास शब्द नही हैं तुम्हारी बहादुरी की तारीफ करने को,
तुमने मुझे जन्म दिया है इसका, ये देश तुम्हारा कर्जदार है,
तुम देखना मेरी कहानियां सुनकर कितने वीर जन्मेंगे अभी,
अपने बेटों की शहादत के लिए जाने कितनी माँ तैयार हैं....

Sunday, 27 January 2019

Friendzoned v/s Single....

This is an art of Shashikant Sharma. When not found a suitable cover for my poem, just drawn it.

जब उसने पहली बार एंट्री ली, वो पल बहुत ही ब्यूटीफुल था,
तुम बात करने के मौके ढूंढ रहे थे, मैं निहारने में मसगुल था,
यूँ तो हम दोनों ही उसके आशिक़ है, जिसे वो नहीं जानती,
तुम करीब होने के बाद भी अगर दूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

हम दोनों चाहते है उसको, कि वो रोज पढ़ने के लिए आये,
हम चाहते हैं कि अंताक्षरी हो, और वो कोई गीत सुनाए,
मैं चाहता हूँ वो पैदल घर जाए, ताकि पूरे रास्ते उसे देख सकूं,
तुम खुद की बाइक पर उससे दूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

कही भी चले जाते हो अगर तुम, उसके ज़रा सी बुलाने पर,
मैसेज करते हो जाने कितने, उसके ऑनलाइन आने पर,
मेरे तो न कांटेक्ट लिस्ट में है वो, ना फ्रेंड लिस्ट में ही है,
छोटी बातों के लिए भी उसके मुखबिर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

तुम हर बार हँसा सकते हो उसको, अपने फालतू जोक्स सुनाके,
मैंने तो उसे देखा भी नही है कभी, नज़रो से नज़र मिलाके,
वो रो कर तुम्हे गले लगा ले, तो मुझे उसके आंसू दिखते है,
उसका टच पाकर तुम खुशी में चूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा हमें, दुगना खुश कर जाती है,
उसके आंसुओ की वजह तो वो, खुद रोकर तुम्हे सुनाती है,
मुझे तो उसके मायूस चेहरे की वजह भी पता नहीं चलती,
तुम सबकुछ सुनकर भी मजबूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसके आंखों की चमक को, मैं हर पल ही एहसास करता हूँ,
तुम बात कर लेते हो उससे, मैं उसके hi को ही याद करता हूँ,
मैं अनजान हूँ पर तुम जानते हो, वो किसी और पे मरती है,
*As a friend* अगर तुम मशहूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

उसे कैसा लड़का चाहिए ये बात, उसने तुम्हे कभी बताया है,
तुम्हारे भीतर वैसा ही बनने का, वाहियात सा खयाल आया है,
मैं जैसा हूँ कोई वैसे ही क़बूल कर ले मुझे, तो क्या बात,
और तुम्हारा प्रपोजल उसे नामंजूर हो, तो मैं सिंगल ही सही.

This also is an art of mine. Shown through this pictire how a single guy looks at his crush.
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Sunday, 13 January 2019

हम जननी कि गइल अन्हरिया, रात अँजोरिया आइल.

You can check out below audio, if get trouble while reading.
This is an awesome creation.
हम जननी कि गइल अन्हरिया, रात अँजोरिया आइल,
गोरा गईले गइल गुलामी, असल स्वराज भेटाईल,
हम जननी की गइल अन्हरिया, रात अँजोरिया आइल,

गांधी बाबा के जिनगी के गुन, गाँवे गाँवे गवाईल,
प्रजातंत्र के मंत्र फूँक के, मोटका खादर सियाईल,
सब चान्हाक नेता बन गईले, बुड़बक लोग पछुवाईल,
हम जननी........

रूस अमेरिका से कर्ज़ा लेके, कल कारखाना खोनाईल,
मंत्रीजी के साढ़ू-साला, साझेदार राखाईल,
असली माल अब मिलत नईखे, नकली बा महंगाईल,
असली ह कि नकली ई, चिन्हलो से ना चिन्हाईल,
आ हम जननी कि........

आई. ए., बी. ए., एम. ए. कईल, सब बेकार काहाईल-2,
जवना जवना आफिस में गईनी, sorry शब्द सुनाईल-2,
मंत्रीजी के बेटा नाती, उनके काम भेटाईल,
आ हम जननी कि.......
गोरा गईले गइल गुलामी......

rail में देखनी ठेलमठेल-2, कतना पाकिट मराईल-2,
पढ़वईया बिना ticket के चढले, अनपढ़ लोग धराइल,
TTE, guard बेचारा बनके, बोगी में चलस लुकाईल,
Chain-pull के बात जन पूछी, भैकम खूब कटाईल,
हम जननी........

बस में देखनीं कसम-कस-2, बोरा अस गांजाईल,
कुछ लोग बईठस छत के ऊपर, कुछ लोग पीछे टांगाइल,
जे कहलस कि भीड़ भईल बा, उल्टे उहे डाटाईल,
कंडक्टर आ खालासी के देखनीं, कुक्कुर अस बघुवाईल,
हम जननी.......

चोर चलत बा सीना तान के-2, साधु चलस लुकाईल-2,
सतवंती के रोवत देखनीं, बेश्या के मुस्काईल,
इज्जतदार के गुपचुप देखनीं, लंगवन के आफानाईल,
हम जननी........

सटल पैंट आ सटल टी-शर्ट-2, तेरे नाम बार कटाईल,
पढ़े लिखे में जीरो समझब, हीरो चाहस कहाईल,
फैशन में चूर passion लेके, रोड पे चलस अगाराईल,
केहू कहे कि लईका ह, केहू के लईकी बुझाईल,
लईका ह कि लईकी ई, बिजय से भी ना चिन्हाईल,
हम जननी..........
गोरा गईले गइले गुलामी......
हम जननी कि........
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I can't ever think this great. Really, this is only my Papa, who can make this happen. I Love You Papa. I really want to be a little bit like you. And that day will be my greatest achievement.

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Thursday, 10 January 2019

Me and She.....

Check out my audio below. But this will soon be replaced with a video of the same poem, with my face.


मैं उस रोज़ अपने मोड़ से बस में चढ़ा, वो मेरी क्लास का पहला दिन था,
सीट पर बैठने के बाद फ़ोन निकाल कर, मैं गाना सुनने में लीन था,
कि गाड़ी उसके मोड़ पर पहुंच गयी जाने कब, मुझे तो पता भी न चला,
और वो जिसने दरवाजे से entry ली, उसका चेहरा बड़ा ही हसीन था.
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उसे देखते ही मैंने खुद को चुपचाप, अपनी सीट से खड़ा कर लिया था,
ये पहली बार था शायद जब उसको, किसी नई अपना सीट दिया था,
किसी को ये मेरा चीप बेहवीयर लगा, तो किसी को अच्छा भी लगा था,
पर चलो मुझे खुद से तसल्ली थी कि मैंने, कुछ तो अच्छा किया था.
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फिर चुप चाप सी वो, चुप चाप से मैं, उतरे एक ही जगह पर हो गए दो ओर,
रिटर्न में वो पहले से ही बस में थी, मैंने भी पकड़ लिया सीट का दूसरा छोर,
अगले दिन जैसे ही वो अंदर आयी, मैं फिर अपने सीट से खड़ा हो गया,
कि तभी मेरी सीट पर एक आंटी बैठ गयीं, और वो बैठी जाके कहीं और.
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निकलता टाइम पर ही था, भले ही मैं जल्दी तैयार हो जाया करता था,
शायद उसी के लिए ही ठंढी में भी, मैं हर रोज़ नहाया करता था,
वो जो चिढ़ता था बहुत, किसी भी परफ्यूम के बेकार सी स्मेल से,
अब क्लोज अप से ब्रश भी करता, और सेट वेट भी लगाया करता था.
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उससे बस दोस्ती करने के लिए ही मैंने, हैप्पन पर एकाउंट बनाया था,
लेकिन इंस्टा और फेसबुक पर भी उसको, मैं नही ढूंढ पाया था,
नज़रे बचा कर चोरी छिपे कभी कभार, बस उसके दीदार हो पाते थे,
और तकलीफ तो ये थी की एक रात भी, उसका सपना तक नही आया था.
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हर बार सीट खाली क्यो मिलती थी इसका, उसे नहीं हुआ एहसास भी,
दोस्ती तो दूर, उसने देखा भी नहीं मुझे, इतने दिन मिलने के बाद भी,
समीज-सलवार पहनी हुई साधारण सी, वो बहुत प्यारी लगती थी,
मुझे याद है मैंने अपनी डायरी में लिखा है, उससे जुड़ी एक याद भी.
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वो लड़की अकेली कहाँ रहती, कहीं भेजा नहीं उसे बस यही सोचकर,
ये समाज जानवरो से भरा पड़ा है, जो रख देंगे उसके कपड़े नोचकर,
ये ज़ख्म बड़े गहरे दे डालते हैं, बस हल्के से ही बदन को खरोंचकर,
तुम बोल नहीं पाओगे की कोई सुने, सब रख देंगे तुम्हें दबोचकर.
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पर मैं तो लड़का था इसलिए मैंने, एक बढ़िया सा रूम ले लिया साल में,
रोज़ बस की भीड़ में अप-डाउन करना, मुझे पसंद नहीं था किसी हाल में,
इसलिए यही रहना डिसाइड किया, अपने दिल के साथ सैक्रिफाइस करके,
और उसके चेहरे की तस्वीर रख ली मैंने, दिल के किसी safe wall में.
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मुझे याद आता है वो तारीख, जिस दिन मुझे रूम पर रहने आना था,
मेरी निगाहें दरवाजे पर ही टिकी थी, उसका चेहरा जो मन में बसाना था,
उसकी एंट्री भी ज़बरदस्त थी, उस दिन काफी सुंदर दिख रही थी वो,
एक तो पिछली रात उसका बर्थडे था, दूसरे एग्जाम देने जाना था.
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उसके पापा ने नोकिया 1200 फ़ोन, बनवा कर दिया उसको गिफ्ट में,
वहीं जो कभी टूट गया था उनसे, किसी बड़े से होटल के लिफ्ट में,
वो अपने दोस्त से कह रही थी कि, उस दिन वो लेट हो जाएगी,
उसका एग्जाम था शायद बीए का, और वो भी सेकंड शिफ्ट में.
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फिर ना हम कभी मिले किसी मोड़ पर, और ना ही हुई हमारी कोई बात,
कुछ इसी तरह से होना लिखा था, मेरी एक नई ज़िंदगी की शुरुआत,
फिर दो-ढाई महीनों के बाद जब मैं गाँव जाकर वापस आ रहा था,
कंडक्टर पूछा हमने आना-जाना, क्यो छोड़ दिया एक साथ.
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मैं हैरान था कि उसके पिता, उसके बाहर रहने के लिए कैसे मान गए,
हो सकता है आने जाने की समस्या को, अब वो भी ठीक से जान गए,
वो पहला दिन था मेरे लिए जिस दिन, मैंने अपना सीट नहीं छोड़ा था,
और उसी दिन से उसको देखने के, मेरे भीतर से सारे अरमान गए.
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एक लड़का बता रहा था उसके गांव का, कि वो बिचारी अब रही नहीं,
उस दिन एग्जाम से आते देरी हो गयी, परिंदा भी दिख रहा था कही नहीं,
परिंदे तो चलो घर लौट जाते है शाम को, पर दरिंदे शिकार ढूंढते रहते है,
4 दरिंदो ने मिलकर उसपर ज़ुल्म किया, उस दर्द को वो और सही नही.
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बाप ने कोई कंप्लेन नहीं किया, न्यूज़ और थाना में एक्सपोज़ होने के डर से,
पर वो दरिंदे सरेआम घूमते दिख जाते है, कभी अपाचे तो कभी पल्सर से,
उन लड़को ने सलाह दिया था, अगर कंप्लेन की तो तेरी एक और बेटी है,
उसकी बहन ने भी पांचवी से पढ़ाई छोड़ दी, निकलती नही वो भी घर से.
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जिसे कंडक्टर ने भाड़ा के लिए डांटा था, सिसकी नहीं सीधा रो गयी थी,
जो पुरानी फ़ोन को भी गिफ्ट में पाकर, बहुत ही ज़्यादा खुश हो गयी थी,
मेरी दोस्त जैसी वो जिसे देखा करता था, अब जाने कहाँ गुम हो गयी थी,
शायद दरिंदगी के बाहर दूसरी दुनिया में, अब चैन की नींद वो सो गयी थी.
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अब से मैं यही रहता हूँ, और कभी अगर घर जाना होता है तो ट्रैन से जाता हूँ. और किसी भी लड़की की तरफ देखता भी नहीं हूँ. भगवान ना करे, पर अगर उसके साथ भी कुछ हो गया तो?
बहुत बहुत धन्यवाद


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Monday, 31 December 2018

And We Never Met.......

Just a poem. Nothing else than just words.
Just an art of mine.
I want assure that this poem is never about me. So, after reading this out, please don't mean something.

She was neither one of my friends, nor village mate,

She did not belong to my relatives. We met in class debate,

And once she told me that she would meet me again,

But a long time has passed, and she never met.


I shaw her for the first time walking fast on a street,

That was the first time, I felt my regular  heart-beat,

She crossed me slightly, and I remained looking at her,

Later I found that she was nobody but my classmate

But a long time has passed and she never met.


I attended every single class of mine, did not bunk,

I was completely in sense, not I was drunk,

when I decided to compete myself against her,

After all she was my competitor, being a classmate,

But a long time has passed and she never met.


The way she used to smile, the way she used to laugh,

Her angry look also was awesome, I can't explain even half,

I could not see moody expression on her beautiful face,

So, in making jokes for her smile, I never got a little late,

But a long time has passed and she never met.


She was right often on some topic, while class lecture,

She was good in drawing chemistry atomic structure,

To prove her wrong, I had an arguement with teacher very often,

I have been punished many times to be out of gate,

But a long time has passed and she never met.


We became friends, who teased each other for no reason,

We were Love birds in different angles and many vision,

We did not share our notes and discussions in class,

Her beautiful handwriting is not recognised to me as yet,

But a long time has passed and she never met.


I did never because of my attitude, but she said- You're right.

That was what my friends used to address as Love Fight,

She was sharp mind, but did not result better than me,

My belief was in doings and that of her was in Fate,

But a long time has passed and she never met.


Even after her no attitude, I named her miss attitude,

Her treat for everyone was soft, I treated them rude,

She was going good for her wills, dreams and goals,

She adviced me doing the same and move on to life set,

But a long  time has passed and she never met.


I want meet her last time, to say I was not waiting for her,

That all, she told me are enough for me to take care,

I want to say, I just miss those days when she was in my life,

I know to take any decision, it has been so late,

But a long time has passed and she never met.


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