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| View from village side |
It's not necessary for every person to be a friend. But the reverse is also true. It's not necessary for every friend to be a person. Every known or unknown source of our happiness, be it a person or a thing, can be considered a friend. And happiness has a wide range of varieties. But friendship is about sharing, caring, standing along and vibe matching is Cherry on the Cake. I welcome you to this blog where I share my literary works. They're of both fictional and non-fictional type. Have a look
Monday, 28 July 2025
the Train or ..........
Saturday, 30 November 2024
...... के बाद
उनको देख पाने का आख़िरी मौका खोने के बाद,
उनका भी नहीं रहा मैं सिर्फ उनका होने के बाद,
(After losing the last chance to see her, I couldn't be her despite belonging to her only.)
अब धुंधली पड़ जाएगी उनकी छवि मेरे चित्त से,
कुछ नहीं रहेगा यादों की माला पिरोने के बाद,
(Now her face will blur out of my mind and there will left nothing despite stringing a garland her memories.)
मैं चाहता नहीं हूं वो हो जाए सपना मेरे खातिर,
ये मैं चाहता हूं उनके ही सपने संजोने के बाद,
(I don't want her to become a dream for me. And I want this after dreaming of her.)
मैं चाहता हूं उनके सपने आए तो मैं जागूं ही ना,
यानी उनके सपने देखूं हमेशा खातिर सोने के बाद,
(I don't want to wake up after dreaming of her. It means I want to dream about her after my permanent sleep (de@th).)
बताऊं किसको, कौन सुनेगा और समझेगा मुझे,
आदमी कहां आदमी समझा जाता है रोने के बाद,
(Whom to tell, who will listen to me and feel it? Men are not considered men after once they cry.)
Composed this poetry on the day of someone's final paper. The ongoing exams were the only known dates on which there were opportunities to see her. But none of the 3 days of the final papers of last semester could she be seen. From now on, there are no confirm dates when she comes out of her house, her village and is seen. There are only uncertainty and luck. There left only wishes to God for a glance of her.
Poetry is composed on the request and interest of one of my friends who knew I write the unspoken words of else's. Unspoken in the sense of not spoken to the deserving person or targeted person. It is same like if a gift is given to the needy, it is no more a gift, but a donation. And if a donation is given to dear person, it is no more a donation, but a gift. Hence, if it is not said to the targeted person, it is unspoken.
Wednesday, 27 December 2023
It's been a Decade now
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| An AI Generated Photo |
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| AI Generated representative image |
| Representative image of returning from Chhath Ghat |
| Representative illustration of a room |
| Representative image of girl sitting near temple door |
| Representative image of man riding bike and girl sitting behind |
| Representative image of Samosa Vendor |
Thursday, 21 October 2021
Crush and Confession
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| Crush sitting below the electricity board, behind the door |
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Monday, 22 March 2021
Memories, Regret and micro tale with Crush
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| A drawing by the web admin Shashikant Sharma |
कल रात को मैंने एक Mini Web Series देखी, ImMature. प्रेम मिस्त्री के निर्देशन में ओमकार कुलकर्णी और रश्मि अग्देकर ने बहुत खूब किरदार निभाया है. कहानी एक School की है, जिसमें लोग पढ़ते हैं. फिर एक backbencher लड़के को एक Frontbencher लड़की पसंद आ जाती है. फिर दोनों में प्रेम होता है, और एक को शहर छोड़ कर जाना पड़ता है.
कहानी में अगर concept की बात करें, तो कुछ भी नया नहीं है. YouTube पर अगर आप School Love Story लिखकर Search करें, तो 10 में से 9 videos में यही concept देखने को मिलेगा. पर फिर भी मैंने इसे देखा. लड़के को लड़की पर Crush होता है, और वो भी बहुत बड़ा वाला. इतना बड़ा वाला, कि अगर वो सामने हो, तो आवाज़ नहीं निकलती. अगर वो आसपास हो, तो इतना nervous हो जाता है लड़का, कि वहाँ से उसे भागना पड़ता है. पर ये कहानी छोडिये. क्योंकि सबके साथ यही होता है, अगर Crush हो तो.
सुबह मैं Bike लेकर निकला तो अकेले होते हुए भी आज मेरा Odometer बढ़ नहीं रहा था. मैं 32 के Speed से चला हूँ, करीब आधे घंटे. इस बीच मैंने खुद से बातें भी की, और मुस्कुराया भी बहुत हूँ. आज ये Realize हुआ है कि life में न, कुछ चीजों का Regret रह जाना भी ठीक है. अच्छा लगता है, अगर आप अपने जीवन से जुडी कुछ पुरानी चीजों को, कुछ पुरानी बातों को miss करते हैं.
अगर सीधे-सीधे अपनी बात पर आना चाहूँ, तो उसका नाम था नेहा. Classmate थी, और मेरी दूसरी Crush थी. शुरू-शुरू में मैं Frontbencher हुआ करता था. फिर मुझे कुछ दोस्त मिल गए, और मैं Backbencher बन गया. लेकिन वो Frontbencher ही रही. उसने अपनी seat नहीं बदली, और न ही class में अपनी Position. मैं पढने जाता था, पर उसे देखने के लिए नहीं, उसको दिखाने के लिए.
हमने कभी भी Co-Operation से काम नहीं किया. मुझे उससे चिढ रहती थी. इसलिए क्योंकि वो सबकी चहेती थी.सब उसे बहुत मानते थे. सब उसे बहुत चाहते थे. नाम भी तो नेहा था, अंग्रेजी में Adorable. पर उसी class में नेहा नाम की दो और लड़कियां भी थीं. लेकिन किसी का Crush बनने के सारे गुण इसमें थे, उन दोनों में नहीं.
अगर हमने Co-Operation से काम लिया होता, तो मैंने भी उसकी notebook मांगी होती, और Return करते समय उसपर कुछ लिख कर दिया होता. मैंने भी exam में उससे help मांगी होती, या उसकी help की होती. मैंने भी पीछे से उसकी Copy में झाँका होता.
अगर गलती से हम आगे-पीछे नहीं भी बैठते, तो हमने भी इशारों में बातें की होती, और हमने भी बराबर Number लाया होता. लेकिन हमने कभी Co-Operation को अपने Ego से जीतने ही नहीं दिया. अगर हमने Co-Operate किया होता, तो हम भी आपस में Group Study करते या एक दुसरे के Doubts आपस में Clear करते.
पर नहीं न. उसे तो मेरा नाम भी बस इसलिए पता था क्योंकि हम 8 बाई 12 के एक ही Classroom में पढ़ते थे, और लोग मुझे मेरा नाम लेकर बोलते थे तो उसने कभी सुना होगा. पर मुझे तो सबकुछ पता था. मुझे तो ये तक पता था कि वो यहाँ की थी भी नहीं, बल्कि कहीं और से आये थे पुरे परिवार, और अब यही रहने लगे हैं. मुझे तो उसके बारे में ये तक पता था कि वो कितने भाई-बहन है और कौन कहाँ रहता है. मुझे ये तक पता था कि उसकी Height मेरे नाक के जितनी बराबरी पर थी, और उसका पास से गुजर जाने के बाद मुझे 12 मिनट 43 सेकंड लगते थे Recover होने में.
हाँ, पर अगर उस समय कुछ नहीं पता था तो बस ये कि वो मेरी Crush थी. क्योंकि उस समय मुझे यही नहीं पता था कि Crush क्या होता है. मैं Class आने के बाद सबसे पहले उसी को ढूंढता था. और अगर वो दिख जाती थी, तो लगता था रात भर रट्टा मारना बेकार नहीं गया. सब चीजें याद होती थी मुझे. सारे Concepts Clear होते थे. लेकिन class में अगर मुझसे कुछ पूछा गया हो, और उसने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देख ली हो, मैं भूल जाता था सबकुछ. इसीलिए हमने कभी एक दुसरे को कोई help नहीं की.
पता है, मैं इस तरह का डरपोक था कि एक बार गलती से हम दोनों एकसाथ सीढियाँ उतर रहे थे, तो मैं गिरते-गिरते बचा. फिर मैं वही सीढियों पर रुक गया, और जब वो उतर गई, तब मैं उतरा. मेरी कोशिश जरुर रहती थी, पर उसके आस-पास होने पर मैं Normal नहीं रह जाता था. और ये बात मुझे उस समय नहीं पता था. वरना आज बात कुछ और होती. भले अभी जो है उससे ख़राब ही होती, पर कुछ और होती.
उसने कहा था:- "लोग मेरी आँखों से डरते हैं." सही बात है. मुझे वो आँखें जादूगरनी लगती हैं. मैं उन आँखों को देखना नहीं चाहता. class में भी मेरी कोशिश होती थी, मैं उन आँखों को न देखूं. पर उसे लगा मेरे में attitude है. मैं क्या attitude दिखाऊंगा.
पता है, अगर मुझे पहले पता होता कि मेरा उसपर Crush है, तो मैंने भी उसको Ice-Cream के लिए पूछा होता. जबकि मुझे पता है कि उसने Reject ही करना था. Farewell पर मैंने भी उसको कुछ लिख कर दिया होता. जाते जाते मैंने उससे ये पूछा होता कि आगे का क्या Scene है. उसकी Advice ली होती कि मुझे क्या करना चाहिए.
मैं सबकुछ करता था. लेकिन मुझे कभी ये पता नहीं चला कि क्यों करता हूँ. उसके दिख जाने के बाद जो सुकून मिलता था न भाई, 30 में से 30 मिलने पर भी वो सुकून नहीं मिला कभी. पता है, उसकी मुस्कराहट से ज्यादा उसकी हंसी मुझे अच्छी लगती थी. क्योंकि जब वो खिलखिलाकर हंसती थी न, तो उसके right side के दांत दीखते थे जो बड़े-छोटे हैं, और अव्यवस्थित तरीके से हैं.
अगर मुझे पता होता कि वो मेरी Crush है, तो मुझे भी उसके आने पर सबकुछ Slow Motion में होता हुआ महसूस होता. मुझे भी लगता कि उसके लहराते बाल और उसकी मुस्कराहट देखकर आसपास की सारी चीजें अच्छी लगने लगी. मुझे भी लोग आवाज़ देते, और मैं उसे देखने में खोया रहता. मैं भी Close Up से Brush करके जाता पढने.
पर क्या होता है इन सब से? मैंने एक दिन उसे Message किया, Hi, This is me, (__my name__). उसका सवाल आया- "मेरा Number कहाँ से आया तुम्हारे पास?" फिर मुझे Block भी किया गया. पर कोई बात नहीं. मेरा Self-Respect नहीं टुटा. इसलिए क्योंकि एक तो बिना उसकी मर्ज़ी के मैंने Number निकाला था, दुसरे वो मेरी Crush थी ये बात मुझे बाद में पता चल गई थी, class ख़तम हो जाने के बाद. Number Deleted.......
लेकिन Telegram वालों को एक अलग ही Chul होती है. वो कहते हैं कि number delete भी हो गया तब भी वो बताएँगे कि इस number से Telegram account बनाया गया है. तो मुझे खबर मिला. मैंने Profile देखी. फिर एक photo की sketch मैंने बना दी. वो sketch आज भी मेरे जेब में पड़ी है. पर सुबह नहीं थी.
सुबह जब मैं Bike चला कर जा रहा था, तो मेरे मन में उस Film को याद करके सिर्फ-और-सिर्फ नेहा के ही ख्याल आ रहे थे. यहाँ तक कि आज जब मैं maths के question solve कर रहा था, तो उसमें भी नेहा वाला एक question था. उस question को मैं solve नहीं कर पाया. और इत्तेफाक़ ये था कि आज सुबह जब मैं वापस आ रहा था, तो मुझे नेहा दिखी. मेरी Heart beat थोड़ी तेज़ हुई. आज उसे देखकर सबकुछ Slow Motion में लग रहा था. आज उसे देख कर लग रहा था जैसे सिर्फ मैं हूँ, सिर्फ वो है, पतझड़ है, और हलकी हलकी धुप है.
मेरी कल्पना शक्ति अगर ठीक हो तो मुझे लग रहा था Mask के पीछे छुपा हुआ उसका चेहरा मुस्कराहट से भरा होगा.उसके आँखों की चमक देखकर लग रहा था जैसे उसे भी कुछ तो कहना था. और मुझे भी कुछ तो कहना था. और आज तो कोई भी नहीं है उसके और मेरे दरमयान, अगर मैं अपने डर की गिनती न करूँ तो. पर चलो, आज अपने डर पर काबू पाया जाए. आज उससे बात किया जाए. क्यों न उसे उसका sketch दे दूँ मैं, और इसी बहाने थोड़ी बात भी हो जाएगी.
पर वो Sketch, जो 1 फरवरी से ही हर रोज मेरे जेब में हुआ करता था, आज नहीं था. कारण कि कल ही मैंने एक Online exam दी थी, जिसमें सारे जेब खाली करवा दिया था उन लोगों ने. अगर मैंने वो Exam नहीं दी होती, तो आज बात कुछ और होती. या फिर अगर वो sketch मैंने फिर से जेब में रख ली होती, तो आज बात कुछ और होती. पर नहीं.
आज सड़क पर सिर्फ वो थी और मैं था. मैं sketch ढूंढने के लिए जब तक अपनी जेब टटोलता रहा, वो आगे निकल गयी. पर मैंने तीसरे paragraph में ही कहा है, कि कुछ चीजों का छुट जाना भी अच्छा है. उन यादों को जब याद करते हैं, उन्हें जब आप miss करते हैं, तो कहीं न कहीं आपके मन में ये ज़रूर आता है कि काश, उस पल को फिर से जी सकता ,और अपनी गलतियाँ सुधार सकता. यानि कि कहीं न कहीं आपको ये एहसास हो गया है कि आपने गलती की है. और गलती का एहसास हो जाना ही सबसे बड़ी बात है.
नेहा के बारे में ये कहूँगा कि वो मुझे बस अच्छी लगती थी. उसके प्रति कोई भी Sensation नहीं होता था मन में. शुरूआती समय में, जब हम दोनों साथ में पढ़ते थे, तब उसके आसपास होने से थोड़ी सी abnormality आ जाती थी. पर अब ऐसा कुछ नहीं है. हाँ, उससे बातें करने का मन होता है. लगता है कि Classmate होने के नाते मुझे उससे बात करनी चाहिए. पर ये भी याद आ जाता है कि उसने मुझे Block किया हुआ है.
सुना है वो एक Ambitious लड़की है. अगर है तो अच्छी बात है. सुना है उसका Behavior भी change हो गया है. अब ये Positive Change है या Negative Change ये मुझे नहीं पता. और मैं अगर कभी उससे बात करूँ, तो ये Note करना नहीं चाहूँगा, और न ही judge करना चाहूँगा कि उसके Changes Positive हैं या Negative. पर जिस हिसाब से मेरा रवैया है, मुझे भविष्य में ये दूर तक संभव नहीं नज़र आ रहा कि मेरी उससे कभी बात भी होगी. उसने कहा था लोग उसकी आँखों से डरते हैं. जाने क्या बात होगी.
आज मैंने उसकी आँखों में देखा. मुझे डर नहीं लगा, अच्छा लगा. अगर उसे कोई ऐतराज न हो तो मैं चाहूँगा उन आँखों में देखते रहना. पर एक मलाल रह जायेगा. आज मौका था. आज मैं उसको कह सकता था कि सुनो, तुम्हें जो समझना है समझ लो. पर मुझे तुम अच्छी लगती हो. और मुझे मेरे बारे में तुम्हारी राय नहीं जाननी. आज मैं उसको दे सकता था उसकी sketch, जो मैंने बनाई थी, और कहता, कि सुनों, यूँ लोगों को आँखों से डराना छोड़ो. जो काम प्यार से हो सकता है, उसके लिए डराने की क्या ज़रूरत है.
मैं उससे कहता कि सुनो, पहले भी मैंने बहुत सारे Moments miss कर दिए हैं. और आगे भी कई सारे moments miss करने वाला हूँ. क्योंकि अगर तुम्हें आगे निकल जाने का शौक है, तो ज़रूरी नहीं कि तुम exam hall में मेरी help करो. अगर तुम्हें ऊपर जाना है, तो ज़रूरी नहीं कि तुम मुझे सही answers दो. हाँ पर मेरी ये ख्वाहिस जरुर थी कि हमारी भी कोई story होती. या फिर कोई story न सही कोइ Micro tale ही सही, पर होती. सुनो, मेरी एक ख्वाहिश जरुर थी कि हमारी भी एकसाथ में कोई याद हो. फिर चाहे उस याद में तुमने मुझे Reject ही क्यों न कर दिया हो.
अगर मुझे पता होता कि वो मेरी Crush है, तो जब भी कभी Classroom के Gate पर हम दोनों एक साथ मिलते, तो मैं थोडा Awkward Feel करता. मेरी भी धड़कने तेज़ होती, और मेरे दोस्त लोग मुझे भी चिढाते उसके नाम से. अगर मुझे पता होता, तो मेरे दोस्त मुझे भी तरीके बताते, नेहा को Impress करने के.
पर मैं बस उससे ये सारी बातें कह पाता, जो कि कह नहीं सका. समय पर sketch न मिलने का Regret. समय पर crush को Crush न समझने का Regret. समय पर हिम्मत न आने का regret. इन सबको याद करके खुद में ही खो जाना, अच्छा लगता है. लगता है जैसे मेरे डर के वजह से ही सही, कम से कम वो अपने aim को Pursue कर रही है. भले ही वो मुझे Credit न दे.
The above published note is derived from a phone call. Names, mentioned in the note, are imaginary and connection to a real body is just a co-incidence. We are not intended to hurt anyone physically or mentally.
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Monday, 13 January 2020
इश्क़ और ठंढ.....
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| ये कोई कविता नहीं है, बस मन में आने वाला एक खयाल है, जिसे ज्यों का त्यों लिख दिया है। |
मैं चलता जा रहा हूँ। सोचता हूँ कभी कभी, किसी किसी बात को। मुझे नहीं पता ये सबकुछ क्या चल रहा है। कभी कभी खुद में ही सरकार की नीतियों और विपक्ष के मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। लेकिन ये सब कुछ सिर्फ एक कोशिश मात्र है। मुझे पता है कि इसका कुछ होने वाला नहीं है। और मुझे ये भी पता है कि अगर कोई राजनीतिक दल अच्छा नहीं भी है तब भी हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, उसे बदलने का, या फिर उसे सुधारने का।
वो कहते हैं न, कि जो होनी होती है, वो होकर ही रहती है। कुछ ऐसा ही था मेरे साथ भी। उस दिन चलते-चलते मेरे सामने अचानक से वो प्रकट हो गयी। मैंने ज़रा गौर से उसके चेहरे को देखा। अरे, ये तो वही चेहरा था, जिसे मैं हमेशा देखना चाहता हूँ। कई बार मैंने कोशिश की कि उस चेहरे को अपनी आँखों में बसा लूँ, ताकि उसे देखने की बेचैनी ख़तम हो जाए। लेकिन इन आँखों में तो आँसू भी नहीं आते, फिर उसके चेहरे की तस्वीर तो बहुत बड़ी बात हो जाती है।
कई बार मैं सोचता हूँ, ये इश्क़ होता ही क्यों है। लेकिन फिर मैं सोचता हूँ, मुझे क्या है, मुझे तो इश्क़ हुआ ही नहीं है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि कभी होगा भी नहीं। हो भी सकता है कि चलते- चलते किसी मोड पर कभी इश्क़ हो जाए। वो जैसे फिल्मों में होता है न- LOVE AT FIRST SIGHT, वैसा वाला। और ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि मेरी तो एक Crush भी है। Crush तो समझते हो न?
आओ, पहले Crush ही समझा दूँ। Crush वो होता है जिसे आप प्यार नहीं करते, और न ही वो आपको प्यार करता है। मतलब हो भी सकता है कि वो आपको प्यार करता हो, लेकिन आपको ये बात पता नहीं है। यहाँ तक कि आप ये पता भी नहीं करना चाहते कि वो आपसे प्यार करता है कि नहीं, और आप अपने प्यार का इजहार भी नहीं कर पा रहे हैं। ये वो है, जिसके पास आने पर आपकी धड़कने तेज़ हो जाती हैं, घबराहट, शर्माहट, हिचकिचाहट, और सारे आहट महसूस होने लगते हैं। आप उससे बात करना चाहते हैं, लेकिन उसके पास भी नहीं जा पाते। आप उसको खुश रखना भी नहीं चाहते और परेशान भी नहीं देख सकते। Crush मतलब वो, जिसके लिए आप पढ़ने जाते हो, लेकिन पढ़ नहीं पाते। जिसे सामने बैठा कर सिर्फ देखते रहना चाहते हो, लेकिन उससे नज़र भी नहीं मिला पाते। ऐसी बहुत सी चीजे हैं, जिससे आपको लगता है कि आपका किसी पर Crush है।
Crush तो मेरी भी है। ये Crush ही तो है, जो अभी अभी दिखी है। हर बार सोचता हूँ, जी भर कर देख लूँ। देख लूँ ताकि इस चेहरे को अपनी आँखों मे बसा सकूँ। आँखों में बसा सकूँ ताकि अगली बार उसे देखने की बेचैनी न रहे। लेकिन इन आँखों में तो इतनी भी जगह नहीं है कि इनमें आँसू आ सके। मैंने अपना फोन निकाला। अभी कुछ देर पहले मैंने अपना लोकेशन देखने के लिए अपना फोन नहीं निकाला था। मुझे ठंढ लग रहा था। लेकिन अभी Crush की तस्वीर लेने के लिए मैंने फोन निकाला। सोचा, चलो आँखों में न सही, फोन में ही उसकी तस्वीर कैद कर लेता हूँ।
जैसे ही मैंने camera को on किया, उधर से Pop-Up आया, No enough space in memory. हाँ, याद आया। कुछ दोस्तों की यादें हैं, memory में। मैंने फोन का storage देखा। मेरे फोन में तो 0 KB जगह बची थी। और crush की तस्वीर कम से कम 1.5 MB का होगा। मैंने सोचा दोस्तों की यादों को memory से बाहर कर देता हूँ। लेकिन फिर सोचा- एक लड़की के लिए? और वो भी ऐसी लड़की, जिसका नाम भी नहीं पता मुझे, जबकि लगातार 6 साल से उस एक चेहरे की जगह कोई दूसरा चेहरा नहीं ले पाया है। इतने में तो लोगों के बीच S** और Break-Up भी हो जाता है।
मैं सोचता हूँ अगर कभी वो मेरे बारे में सोचती होगी तो क्या? यही न कि मैं फटटू, डरपोक, बुजदिल हूँ। क्योंकि उसे थोड़े पता है कि मुझे कभी बोलना ही नहीं है। लेकिन फिर सोचता हूँ, क्या वो मेरे बारे में सोचती भी होगी?
थोड़ा अजीब है, लेकिन सच है।
दोस्त तो ज़िंदगी की एक अटूट कड़ी होते हैं। उनकी ही यादें मिटा दूँ मैं? लेकिन यादें तो मैं फिर से भी बना सकता हूँ। लेकिन फिर से यादें बनाने के लिए इसका चेहरा memory से हटाना पड़ेगा। अजीब असमंजस है। एक तरफ दोस्त हैं, दूसरी तरफ Crush है। लेकिन किसी ने कहा है- जो मिलता है उसे रख लेना चाहिए। चलो, दोस्तों के साथ जो भी यादें है, या तो उन्हे मिटा दो या फिर छोटा कर दो। लेकिन Crush की तस्वीर तो चाहिए। क्योंकि बार बार उसे कहाँ-कहाँ ढूँढता रहूँगा मैं। फोन में अगर उसकी तस्वीर आ जाए तो क्या बात है। दोस्तों से कह भी तो पाऊँगा- ये तुमलोगों की भाभी है।
क्या ये बदनाम करना नहीं होगा? अच्छा दोस्तों से नहीं कहूँगा। मेरे इश्क़ को गुमनाम ही रहने दूंगा मैं। Feeling क्या होता है? तुम उसका पता बता दो तो मैं उसकी शादी के दिन उसकी बारात में जाकर खाना भी खा सकता हूँ। ये कोई बड़ी बात नहीं है। यहाँ तक कि बिना कुछ महसूस किए उसका जयमाला का स्टेज भी सजा सकता हूँ।
लेकिन मुझे तब भी उसकी एक तस्वीर लेनी है। चलो, उसकी तस्वीर लेने के लिए दोस्तों की यादों को नहीं मिटाऊंगा, भले खुद को ही खोना पड़े। लेकिन वो गयी कहाँ !!!!!!!!!!!!!!!?????
इतनी देर से जो मैं सोच रहा था, क्या वो सब एक ख़याल था? क्या वो एक सपना था? नहीं, चल तो रहा था मैं। सड़क पर पड़े एक पत्थर को ठोकर भी मार रहा था। क्या ये सब झूठ है? क्या वो मुझे दिखी भी थी?
मैंने खुद को एक झापड़ लगाया। चोट लगता है, इसका मतलब ये सब हक़ीक़त है, कोई सपना, कोई ख़याल नहीं है। मैं रुक कर सोच रहा था, उस चेहरे को फिर से देखना पड़ेगा। इस बार भी मैंने उसे बढ़िया से नहीं देखा।
मैं एक तरफ थोड़ा तेज़ी से भागा। इस उम्मीद में कि शायद वो फिर से दिख जाए। कुछ कहना नहीं है, बस एक आखिरी बार देखना है। या फिर उसकी तस्वीर लेनी है, ताकि दुबारा जब भी उसे देखने का मन करे तो देख सकूँ। माँ जब पूछे कि कैसी लड़की चाहिए तो दिखा सकूँ। जब कभी कोई Drawing बनाने का मन करे, तो उसकी तस्वीर बना सकूँ। लेकीन वो नहीं दिखी। अबकी बार मैं दूसरी तरफ भागा, फिर से उसी उम्मीद में। लेकिन वो फिर भी नहीं दिखी। मैं खड़ा हो गया, अब मुझे ये नहीं पता चल रहा था कि मुझे किधर जाना है और मैं आया किधर से था। मुझे उस दिन अपना location देख लेना चाहिए था !!!!!!!!!!
"सिर्फ बनारस की गलियों में ही नहीं जनाब, इश्क़ अक्सर कुहासा में भी खो जाता है।"
Wednesday, 1 January 2020
One Sided Love........ Crush
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| तुझे नज़र न लगे मेरे इश्क़ की, तो क्या हुआ अगर ये काजल नहीं है. |
अरे सुनो, कहीं तुम गलती न कर देना मेरी मोहब्बत को समझने में,
फ़ायदा उठाकर अपनी मासूमियत का इसे तोड़ भी देना,
समझना ये तुम्हारा खिलौना ही है, मेरा दिल नहीं है,
उसकी अंग्रेजी बातों का पलट कर हमने जवाब नहीं दिया,
थोड़ा नासमझ नादां ज़रूर है दिल पर ये जाहिल नहीं है,
Saturday, 25 May 2019
नमकीन इश्क़
और भाई हम एक तो इश्क़ से अनजान थे, दूसरे इश्क़ से खफा भी थे,
हम तो अकेले ही ठीक हुआ करते थे, घूमते बरसते बादलों की तरह,
मैंने खुद को बचाए रखा था, उसके इश्क़ से भी, उसके हुस्न से भी,
मगर पिघल गया उसकी आँखों में, उम्मीद और मोहब्बत देखकर,
लेकिन मेरा पिघलना भी पिघलना नहीं बल्कि मेरा बदलना जाना था,
आखिर उसे शब्द देने पड़े थे मेरी नासमझी और मेरा शराफत देखकर,
हाये रे उसकी हल्की भूरी आंखे, हाये रे उसके भूरे भूरे से बाल,
उसके सुर्ख़ होंठ और होंठ के ऊपर एक छोटी सी प्यारी सी नाक,
उसने कोई nosepin नहीं लगाए थे उस दिन शायद या मुझे याद नहीं,
उसका इस कदर सुंदर होना हम सब के लिए था एक इत्तिफाक़,
कहते हैं कि जो आया है वो एक दिन जाएगा ही, ये नियम है दुनिया का,
वो चली तो गयी मगर खुद को मेरे भीतर छोड़ गयी थी जाते हुए,
एक पागल सा जिसने formality के लिए भी रुकने को नहीं कहा,
एक बहादुर सी वो, जिसने दिल की बात कह दी थी घबराते हुए,
उसकी बेअसर मोहब्बत ने उसके जाने के बाद असर किया था मुझपे,
वो सब अब महसूस हो रहा था, जो कभी नहीं हुआ था उसकी संगत से,
मुसकुराता चेहरा से लेकर उसकी भिंगी हुई आंखे भी याद आती थी,
ये मोहब्बत है जनाब जिसने किसी को नहीं छोड़ा है अपनी रंगत से,
तुमने तो तुम्हारी हिस्से की मोहब्बत भी अभी पूरी नहीं करी है,
अभी तो मेरे हिस्से की पूरी की पूरी मोहब्बत करनी बाकी है,
मुझे लगता है तुम्हें वापस आना चाहिए हमारे नमकीन इश्क़ के लिए,
अभी तो तुम्हें मुझसे और मुझे तुमसे शिकायत करनी बाकी है.








