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Monday, 13 January 2020

इश्क़ और ठंढ.....

Fog and Smog
ये कोई कविता नहीं है, बस मन में आने वाला एक खयाल है, जिसे ज्यों का त्यों लिख दिया है।

मैं चलता जा रहा हूँ। सोचता हूँ कभी कभी, किसी किसी बात को। मुझे नहीं पता ये सबकुछ क्या चल रहा है। कभी कभी खुद में ही सरकार की नीतियों और विपक्ष के मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। लेकिन ये सब कुछ सिर्फ एक कोशिश मात्र है। मुझे पता है कि इसका कुछ होने वाला नहीं है। और मुझे ये भी पता है कि अगर कोई राजनीतिक दल अच्छा नहीं भी है तब भी हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, उसे बदलने का, या फिर उसे सुधारने का।

गाड़ी से चलने पर सड़कों की खराबी समझ में आती है। लेकिन पैदल चलने का एक अपना ही अंदाज़ है। सड़क पर बने हुए गड्ढे, और उन गड्ढों से निकली हुई एक छोटी सी पत्थर, जिसे पैरों से ठोकर मारते मारते कब आप सामने से आने वाले गाड़ी के करीब पहुँच जाते है पता नहीं चलता है। मौसम अगर ठंढ का हो तो मज़ा कुछ ज़्यादा ही हो जाता है। क्योंकि तब आपके पैरों में जुतें होते है, जो पत्थर को ठोकर मारना और आसान बना देती है।

ऐसे ही मैं भी आज जा रहा था। पैदल चल रहा था, कुछ सोचते हुए। फिर मेरे मन में चल रहा कोई सामाजिक मुद्दा जाने कब गीत में बदल गया पता ही नहीं चला। हैरान तो मैं तब हुआ जब मुझे ये एहसास हुआ कि मैं एक अंग्रेजी गाना गुनगुना रहा था।

मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं पहुंचा कहाँ तक हूँ। मोबाइल निकाल कर अपना location देखने का भी मन नहीं कर रहा था। हाथ को जैकेट के जेब में छिपा कर रखा था। कोई अंग्रेजी, या शायद कोई राहत फतेह आली ख़ान का कोई गीत गुनगुना रहा था। वजह ये थी कि शायद गीत गुनगुनाने से ठंढ का एहसास कम होता है। पर अगर ठंढ से इतना ही दिक्कत है तो घर से निकलने की ही क्या ज़रूरत थी, ये मैं समझ रहा था।

वो कहते हैं न, कि जो होनी होती है, वो होकर ही रहती है। कुछ ऐसा ही था मेरे साथ भी। उस दिन चलते-चलते मेरे सामने अचानक से वो प्रकट हो गयी। मैंने ज़रा गौर से उसके चेहरे को देखा। अरे, ये तो वही चेहरा था, जिसे मैं हमेशा देखना चाहता हूँ। कई बार मैंने कोशिश की कि उस चेहरे को अपनी आँखों में बसा लूँ, ताकि उसे देखने की बेचैनी ख़तम हो जाए। लेकिन इन आँखों में तो आँसू भी नहीं आते, फिर उसके चेहरे की तस्वीर तो बहुत बड़ी बात हो जाती है।

कई बार मैं सोचता हूँ, ये इश्क़ होता ही क्यों है। लेकिन फिर मैं सोचता हूँ, मुझे क्या है, मुझे तो इश्क़ हुआ ही नहीं है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि कभी होगा भी नहीं। हो भी सकता है कि चलते- चलते किसी मोड पर कभी इश्क़ हो जाए। वो जैसे फिल्मों में होता है न- LOVE AT FIRST SIGHT, वैसा वाला। और ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि मेरी तो एक Crush भी है। Crush तो समझते हो न?

आओ, पहले Crush ही समझा दूँ। Crush वो होता है जिसे आप प्यार नहीं करते, और न ही वो आपको प्यार करता है। मतलब हो भी सकता है कि वो आपको प्यार करता हो, लेकिन आपको ये बात पता नहीं है। यहाँ तक कि आप ये पता भी नहीं करना चाहते कि वो आपसे प्यार करता है कि नहीं, और आप अपने प्यार का इजहार भी नहीं कर पा रहे हैं। ये वो है, जिसके पास आने पर आपकी धड़कने तेज़ हो जाती हैं, घबराहट, शर्माहट, हिचकिचाहट, और सारे आहट महसूस होने लगते हैं। आप उससे बात करना चाहते हैं, लेकिन उसके पास भी नहीं जा पाते। आप उसको खुश रखना भी नहीं चाहते और परेशान भी नहीं देख सकते। Crush मतलब वो, जिसके लिए आप पढ़ने जाते हो, लेकिन पढ़ नहीं पाते। जिसे सामने बैठा कर सिर्फ देखते रहना चाहते हो, लेकिन उससे नज़र भी नहीं मिला पाते। ऐसी बहुत सी चीजे हैं, जिससे आपको लगता है कि आपका किसी पर Crush है।

Crush तो मेरी भी है। ये Crush ही तो है, जो अभी अभी दिखी है। हर बार सोचता हूँ, जी भर कर देख लूँ। देख लूँ ताकि इस चेहरे को अपनी आँखों मे बसा सकूँ। आँखों में बसा सकूँ ताकि अगली बार उसे देखने की बेचैनी न रहे। लेकिन इन आँखों में तो इतनी भी जगह नहीं है कि इनमें आँसू आ सके। मैंने अपना फोन निकाला। अभी कुछ देर पहले मैंने अपना लोकेशन देखने के लिए अपना फोन नहीं निकाला था। मुझे ठंढ लग रहा था। लेकिन अभी Crush की तस्वीर लेने के लिए मैंने फोन निकाला। सोचा, चलो आँखों में न सही, फोन में ही उसकी तस्वीर कैद कर लेता हूँ।

जैसे ही मैंने camera को on किया, उधर से Pop-Up आया, No enough space in memory. हाँ, याद आया। कुछ दोस्तों की यादें हैं, memory में। मैंने फोन का storage देखा। मेरे फोन में तो 0 KB जगह बची थी। और crush की तस्वीर कम से कम 1.5 MB का होगा। मैंने सोचा दोस्तों की यादों को memory से बाहर कर देता हूँ। लेकिन फिर सोचा- एक लड़की के लिए? और वो भी ऐसी लड़की, जिसका नाम भी नहीं पता मुझे, जबकि लगातार 6 साल से उस एक चेहरे की जगह कोई दूसरा चेहरा नहीं ले पाया है। इतने में तो लोगों के बीच S** और Break-Up भी हो जाता है।

मैं सोचता हूँ अगर कभी वो मेरे बारे में सोचती होगी तो क्या? यही न कि मैं फटटू, डरपोक, बुजदिल हूँ। क्योंकि उसे थोड़े पता है कि मुझे कभी बोलना ही नहीं है। लेकिन फिर सोचता हूँ, क्या वो मेरे बारे में सोचती भी होगी?
थोड़ा अजीब है, लेकिन सच है।

दोस्त तो ज़िंदगी की एक अटूट कड़ी होते हैं। उनकी ही यादें मिटा दूँ मैं? लेकिन यादें तो मैं फिर से भी बना सकता हूँ। लेकिन फिर से यादें बनाने के लिए इसका चेहरा memory से हटाना पड़ेगा। अजीब असमंजस है। एक तरफ दोस्त हैं, दूसरी तरफ Crush है। लेकिन किसी ने कहा है- जो मिलता है उसे रख लेना चाहिए। चलो, दोस्तों के साथ जो भी यादें है, या तो उन्हे मिटा दो या फिर छोटा कर दो। लेकिन Crush की तस्वीर तो चाहिए। क्योंकि बार बार उसे कहाँ-कहाँ ढूँढता रहूँगा मैं। फोन में अगर उसकी तस्वीर आ जाए तो क्या बात है। दोस्तों से कह भी तो पाऊँगा- ये तुमलोगों की भाभी है।

क्या ये बदनाम करना नहीं होगा? अच्छा दोस्तों से नहीं कहूँगा। मेरे इश्क़ को गुमनाम ही रहने दूंगा मैं। Feeling क्या होता है? तुम उसका पता बता दो तो मैं उसकी शादी के दिन उसकी बारात में जाकर खाना भी खा सकता हूँ। ये कोई बड़ी बात नहीं है। यहाँ तक कि बिना कुछ महसूस किए उसका जयमाला का स्टेज भी सजा सकता हूँ।

लेकिन मुझे तब भी उसकी एक तस्वीर लेनी है। चलो, उसकी तस्वीर लेने के लिए दोस्तों की यादों को नहीं मिटाऊंगा, भले खुद को ही खोना पड़े। लेकिन वो गयी कहाँ !!!!!!!!!!!!!!!?????

इतनी देर से जो मैं सोच रहा था, क्या वो सब एक ख़याल था? क्या वो एक सपना था? नहीं, चल तो रहा था मैं। सड़क पर पड़े एक पत्थर को ठोकर भी मार रहा था। क्या ये सब झूठ है? क्या वो मुझे दिखी भी थी?
मैंने खुद को एक झापड़ लगाया। चोट लगता है, इसका मतलब ये सब हक़ीक़त है, कोई सपना, कोई ख़याल नहीं है। मैं रुक कर सोच रहा था, उस चेहरे को फिर से देखना पड़ेगा। इस बार भी मैंने उसे बढ़िया से नहीं देखा।

मैं एक तरफ थोड़ा तेज़ी से भागा। इस उम्मीद में कि शायद वो फिर से दिख जाए। कुछ कहना नहीं है, बस एक आखिरी बार देखना है। या फिर उसकी तस्वीर लेनी है, ताकि दुबारा जब भी उसे देखने का मन करे तो देख सकूँ। माँ जब पूछे कि कैसी लड़की चाहिए तो दिखा सकूँ। जब कभी कोई Drawing बनाने का मन करे, तो उसकी तस्वीर बना सकूँ। लेकीन वो नहीं दिखी। अबकी बार मैं दूसरी तरफ भागा, फिर से उसी उम्मीद में। लेकिन वो फिर भी नहीं दिखी। मैं खड़ा हो गया, अब मुझे ये नहीं पता चल रहा था कि मुझे किधर जाना है और मैं आया किधर से था। मुझे उस दिन अपना location देख लेना चाहिए था !!!!!!!!!!

"सिर्फ बनारस की गलियों में ही नहीं जनाब, इश्क़ अक्सर कुहासा में भी खो जाता है।"

Wednesday, 1 January 2020

One Sided Love........ Crush

Image downloaded from https://avatweet.com/games/crush
तुझे नज़र न लगे मेरे इश्क़ की, तो क्या हुआ अगर ये काजल नहीं है.


अरे सुनो, कहीं तुम गलती न कर देना मेरी मोहब्बत को समझने में,
ये खूबसूरत ज़रूर है उर्दू की तरह, लेकिन मुश्किल नहीं है,
तुझे संवारा है तेरे ख़ुदा ने वाक़ई बड़े बारीकी और बखूबी से,
फिर भी तेरा ये नूर चेहरा मेरे लिए दीदार के क़ाबिल नहीं है,

हाँ, वो खूबसूरत है लेकिन कितनी ये मैंने कभी देखा ही नहीं,
उसने मारा होगा अपने हुस्न से कईयों को पर वो कातिल नहीं है,
सुना था ये इश्क़ एक अथाह समंदर है, लोग कहते है ऐसा,
लेकिन मेरी मानो तो ऐसा नहीं है कि इसका साहिल नहीं है,

जो साहिल पर खड़े हैं उतरने को समंदर में तो लौट जाओ,
मुझे देखो कि इसमे उतर कर भी मुझे कुछ हासिल नहीं है,
कुछ लोग है, जो तुम्हारे दर्द सुनकर वाह वाह करते हैं,
भले तुम शायर हो पर ये सामने कोई महफिल नहीं है,

अगर वो सुन ले जो मैं उससे कहना चाहता हूँ बिना कहे,
तो क्या हुआ जो उससे कहना केवल मेरी मंज़िल नहीं है,
उसको अगर पसंद है खिलौनों से खेलना तो भी अच्छा है,
वो समझ ले ये बस एक खिलौना ही है, मेरा दिल नहीं है,

तुम कह लेना मुझे भी मोहब्बत उसके चेहरे से ही है,
पर मैंने देखा है उसके चेहरे पर एक भी तिल नहीं है,
अगर चेहरे से मोहब्बत होती तो उसकी तस्वीर मांग लेता,
रोज कहता हूँ खुद से- "सुन तू बुजदिल नहीं है."

इश्क़ करना सिखाया है तुमने अपनी दक्षिणा में दिल ले लो,
थोड़े बहुत ठोकरें लगी हैं इसे पर ये चोटिल नहीं है,
फ़ायदा उठाकर अपनी मासूमियत का इसे तोड़ भी देना,
समझना ये तुम्हारा खिलौना ही है, मेरा दिल नहीं है,

उसकी अंग्रेजी बातों का पलट कर हमने जवाब नहीं दिया,
थोड़ा नासमझ नादां ज़रूर है दिल पर ये जाहिल नहीं है,
आईने में खड़े शख़्स को बड़ी हंसी आई मुझपर एक दिन,
वो मेरा दर्द सुने बैठकर इतना बड़ा भी वो पागल नहीं है.

Friday, 28 December 2018

तुम.....

Love Proposal
A screenshot from my favorite song that days MUJHE KAISE PATA NA CHALA.
सच बदनाम और झूठ उदास कर देती है उसको,
हाँ ये अलग बात है कि वो इससे अनजान है,
ये credit ने महफिलों से दूर कर दिया मुझे,
उदास/बदनाम कैसे करू, आखिर मेरी जान है.
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उसे खुशी थी कि क़बूल हो गयी थी दुआ उसकी,
हसरत थी मुझे अपने दिल की feeling बताने की,
बड़ी तसल्ली थी मुझे मैंने उससे इजहार कर दिया,
उसने दुआ कि थी मेरे वहां से खामोश चले जाने की.
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सुना है पड़ोसियों में अक्सर कमियां दिख जाती है,
या इसे बहाना कहलो मेरे डर, nature, नसीब से,
जब जब उसे देखा है, क्या ग़ज़ब की लगती है वो,
हां ये और बात है उसे कभी नही देखा नज़दीक से.
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उसकी दी हुई smile का एक कतरा भी नहीं बचा,
किसी ने किश्तों में छीन लिया उसकी यादें देकर,
अब उसको सोच कर उदास हो जाता हूँ जाने क्यों,
वो जो पहले मुस्कुरा उठता था उसका नाम सुनकर.
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Let's see who is that girl.....
Some words about her.
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तुम गर्मी की सुबह हो, जो आने से पहले ही अक्सर गायब हो जाया करती है,
तुम जाड़े की शीतलता हो, जो अच्छी लगती है पर सेहत के लिए अच्छी नहीं,
तुम बारिश हो तूफान भरी, कही बहुत ज़्यादा हो, कही बिल्कुल ही नही हो,
तुम्हारे भीतर बसंत की बहार भी देखता हूँ, पर वो शायद उतनी सच्ची नहीं.
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किसी ने जानबूझ कर block कर दिया है, उससे आने वाली मैसेज हो तुम,
जिसने मेरा नंबर ना save किया न याद, तुम उसका आने वाला call हो,
तुम वो perfume हो जिससे कोई मेरे करीब नही आता, पर कोई बात नहीं,
तुम्हारे रहते किसी की entry नहीं दिल में, तुम इसकी protection wall हो.
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तुम वो एकलौती हो, जिसे मैं मेरी कह सकता हूँ, पर उसपर मेरा हक़ नहीं,
एक सपना हो तुम कोई बुरा सा, ना पूरा याद हो, ना ठीक से भुला हूँ मैं,
किसी और के दर्द की तरह हो तुम, चाहता हूँ अपना लूं पर हो नही पाता,
तुम मेरी सोच से ऊपर हो निस्संदेह, क्योंकि विचारों से एकदम खुला हूँ मैं.
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सबसे छिपा कर बड़े प्यार से सहेज कर रखा था जिसे, वो गुलाब का फूल हो,
अब तुममे वो बात नही, वो सुगंध नही, वो खूबसूरती नहीं जो चाहिए थी मुझे,
तुम्हे अपनाना थोड़ा से थोड़ा ज़्यादा मुश्किल है, मुझ जैसे सभी के लिए,
बस तुमसे जुड़ी वो सारी यादें फिर से ताज़ा हो जाती है, जब भी देखता हूँ तुझे,
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सुबह की गर्म चाय की तरह हो, करीब आकर भी लबों से दूर हो ठंढी होने तक,
तुम तो किसी चाबी जैसी हो, अक्सर ज़रूरत पड़ने पर ही गुम हो जाती हो,
तुम कोई कीमती कलम हो, जिससे लिखना नहीं चाहता कि खत्म हो जाएगी,
तुम balcony से लगा मेरा favorite कमरा, जो मेरी ArtRoom हो जाती है.
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कुल मिलाकर I Love You. But तुम्हारे होने ना होने से कोई फर्क नही पड़ता मुझे.
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For my social media profiles, click on them respectively:-

Wednesday, 6 June 2018

हम single हैं, हमें single ही रहने दो..........

No copyrights reserve. The photo is downloaded from Google. I am sorry for that. But I had the only way.
मेरा तो एक ही फंडा है, लड़की को देखना और फिर नहीं देखना,
ये प्यार व्यार, ये आशिक़ी, ये दिल्लगी हमसे नहीं होती:
हमसे तो देखा भी नहीं जाता उन्हे अपनी ओर देखते हुए,
ये गुफ्तगू, ये इंतज़ार ये बंदगी हमसे नहीं होती।
हम जैसे है अपनी मर्जी से कम से कम जी तो रहे है.
हम जो है हमे वैसा ही रहने दो 
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हाँ, हमने सुना है किसी से, कही पे, किसी दिन,
अब तो हर रोज़ सुनते है कोई कहता हुआ मिल ही जाता है हर कही:
की ये मोहब्बत जितनी जल्दी हो जाती है पता नहीं चलता,
पर मोहब्बत निभाने वालों की कमी है अभी भी।
कुछ तो टूट गए कुछ छुट गए इस भीड़ मे दुनिया की.
कुछ बच गए है उन्हे तो बचे रहने दो 
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ये मोहब्बत निभा नहीं पाता तो मतलब ये नहीं की ये कर्ज है,
माँ-बाप भी खुश हो जाते है बेटे की खुशी मे:
यहाँ तो बंदी को गोलगप्पे से भी संतुष्टि नहीं मिलती
और बंदे की आधी से ज्यादा सैलरी जाती है उसी मे।
जो थोड़ी सी बचती है वो valentine और anniversary मनाते है.
किसी को तो घर के बारे मे सोचने दो
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गंदे कमीज पहन कर जो ट्यूशन आते है हफ्ते मे चार दिन,
उन्हे हर डेट पे नई t-shirt पहन कर जाते देखा है:
उनके single दोस्तो से भी मिला जो उसको अपनी t-shirt देते है,
उसके नए नए मोहब्बत का मज़ाक उड़ाते देखा है।
हमसे नहीं हो पाएगी ये नौटंकी अब कभी भी.
हम खुश है इस बात से दुनिया वालों को जलने दो
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कुछ लड़कियों को पसीने से allergy होती है,
make-up धुलने के खतरे को ही एलर्जि कहते है शायद:
उन लड़कियो को compliment देते हुए देखा है मेंने,
इसी चीज़ को कुछ लोग मोहब्बत कहते है शायद।
अगर ये मोहब्बत है तो फिर मैं single ही ठीक हूँ.
मुझे मेरे जैसा ही रहने दो
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मुझे एक लड़की अच्छी लगती है, इतना ज़रूर है मेरे साथ भी,
लेकिन इतना ही है की वो सिर्फ अच्छी लगती है:
उसके रूठने का खतरा नहीं रहता, उसके खर्चे की फिक्र नहीं मुझको,
वो प्यारी है बहुत, शायद  तभी अच्छी लगती है।
लेकिन मैं बस उसको देखता हूँ दूर से ही, बहुत दूर से.
उसको तो पता भी नहीं कोई उसको देखने वाला भी है।
मेंने अपनी कहानी मे इसी को मोहब्बत का नाम दे रखा है,
अगर ये एक तरफा है तो एक तरफा ही रहने दो
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मुझे क्या मिलेगा मोहब्बत को बदनाम करके, अपनी नजरों मे?
जो आज में करूंगा वो कोई स्वीकार नहीं करेगा:
लाएँगे न पापा मेरे लिए प्यार करने वाली, सबकी मर्ज़ी से,
फिर तो उम्मीद है कोई मेरे प्यार के बीच मे नहीं पड़ेगा।
करेंगे अपने हिस्से का मोहब्बत उसी एक से, उम्र भर.
तब तक के लिए भाई मुझे कुँवारा ही रहने दो
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Saturday, 5 May 2018

I am completely yours....... Trust me...


"Oh hi Shashi, what is there?"- sir asked me.
"Nothing sir. A while has passed since I have left this institute. So I was passing by the road, I just took a turn to see you." - I simply said.
after a long conversation, I turned back to my home.
"Hi Shashi." - she said.
She already had walked through the varandah, many times, in hope I would say Bye Bye to sir.
"Hi. How're you?" I asked.
"Good to see you." - she said.
"I am also fine." - I said.
after a silence of about thirty seconds, "I think I should leave now." - I said.
"Won't talk to me?"- she asked.
"Hey...." - I was shocked.
"Won't even look at me?" - she asked.
"When I entered into this institute, the first thing I am trying to ignore is your presence. And you say Won't I look at you?. See, if I could not even see you, why should I need to try ignoring you?" - I said.
"So, how are you?" - She asked.
"I said I am fine." - I said.
"Got married?" - she asked.
"What!!?? Have you gone mad? It's only three years, since we met last time. I am 20." - I said.
"So, what are you doing?" - she asked.
"Nothing great. Still looking for a job." - I said.
"And what about your hobbies?, Like your literature work and painting and all?" - she asked.
"All are stopped. My economical condition is not that good that I could continue it any more."
"I can understand. But you should have to keep trying. This can give you a good respect, money and a status. What else do you need?"
"This is very easy to say. I need to reach an audience, who can understand me, who can even promote me." - I said. "What are you doing by the way?"- I asked.
"Nothing at all." - She said.
"Have you time to go for a breakfast?" - I asked
"Should I think you are asking me for a date?- she asked.
"If that is the way, you will come agree, yes." - I said.
"Where?" - she asked.
"Come no." - I said and offered her my back seat.
There was a bag in the mid, between us.
"Can I hold you?" - she asked.
"Trust me, I am good at riding. You don't need to hold me. You are safe." - I said.
"To feel comfort?" - she asked.
"Trust me. You won't need further. Just try this time." - I said.
"So, have you something to say or should I start?" - she asked.
"If you have, you can." - I allowed.
"Ok then. Be responsive." - she said.
"I will try." - I said.
"Have you girlfriend?"
"Are not you a?"
"Have you a crush?"
"Not at all."
"Will you try again to me?"
"Do you know what are you saying?"
"Shashi, I felt nice when you used to look at me. Others don't look at me, they just stair. I felt nice when you used looking elsewhere, when I looked back at you. Others don't look elsewhere when I look back at them. They just steer me something unpleasant. Shashi I felt good getting your protection, your care and your support for nothing. Others don't do these for nothing. They all are thirsty for I don't need to say." - she said.
"We have come to the hotel." - I said and stopped the bike and asked her to step down.
"Shashi, yarr, I was saying something." - she said.
"Oh, I thought you were proposing me indirectly." - I said.
"Is this what is called a proposal?" - she asked.
"This also is called a proposal. Let's go inside." - I said and we entered into a hotel.
"Can we be serious about this?" - she asked.
"No" - I said.
"Why did you care me that much then?" - she asked.
"When? I don't remember."
"Why did you support me in classroom?" - she asked.
"Cause you were right. And why do you forget this was only me who were often come against you?"
"And why were you looking at me?" - she asked.
"Cause someone had told me that you had crush upon me. I was just being sure about that."
"Then why did try to contact me?" - she asked.
"Just because I thought you are in love with me and don't dare to propose me. This is called waste of time. I was trying your time not to be wasted. But when you told me you don't think about me in that way, I came assure that there is nothing between us. And I continued to me."
"You are not at you Shashi." - she said.
"And how do you know ma'am?" - I asked.
"You forgot you was saying to make your hobby your profession."
"And you told me once that you don't think about me that bad."
"Shashi, is not it called love that we are fighting with each other?"
"This is not love fight ma'am."
"Shashi I know you still love me."
"Best wishes to your knowledge. May they don't be broken.!"
"Shashi, you have to admit it that you loved me."
"And I surrender." - I finally admited. "You were the most beautiful girl in the institute. You have any idea how gorgeous you were looking at the annual function of the institute? I had gone mad upon that one look of your the day. You won't understand. You don't have any idea I had done a fight with Himanshu for the voice of yours, he had recorded in his phone. And finally I deleted that audio. Stupid, I loved you to the limitation of it. And when I asked you, you just simply said no. Do you have any idea how hurting that was for me?"
"Shashi, I was not ready for your that sudden attack." - she said.
"Yes, that has been an attack. And you don't know I too was not ready for your no. The cuteness in our fights in classroom we had, is called love fight. You have no idea what love is called." - I said.
"I tried to connect to you."- she said.
"Whom?" - I asked.
"To all in my circle."
"I am still in contact of everyone. And what was need to ask in your circle? You just simply had to unblock me and text me a message."
"I have changed my phone."
"Still there is an option to unblock, even you are usigng WhatsApp web or application in any device." - I said.
"And you think I am that good in technical problems?"
"Where is your previous phone?"
"It was broken. I did that."
"Whom did you contacted to reach me?
"My mom and dad." - she said.
"And you thought they should be knowing about me?"
"I said I contacted in my circle. And I added that my phone was broken. Then who else remains in my circle?"
"Your brother?"
"He said he did not know."
"So."
"Let's have a deal between us. You have to keep writing stories, pieces of poetry and what you love."
"And you?"
"Think I am a passing cloud who came and went." - she said.
"Fine, then if your presence does not matter, our meeting does the same. Coming a single step ahead, I think we have not met." - I said.
"Shashi, I won't be with you any more. But I want see you at the top of success." - she said.
"If this is you, I am losing because, don't expect something from me." - I said.
"Fine, can I have a hug with you?" - she asked.
"Of course!"
"I love you so much...... that I can't explain in words." - she said and hugged me.
"And you think I don't love you? I love you stupid, still more than former....." - I said and our love story moved to a twist.
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Who knows about what congress in dreams. Dreams make sometimes us pleasant with the joy, waar can never have our entire lives. But thanks that at least I felt her hug in my dream.