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Friday, 24 April 2020

लड़ाई कोरोना से बा कि लोग से.......

Don't cross the boundary, Covid-19 may cross its limit too


उ खाटी देहाती ह, ओकारा भी जाने केताना बाहाना बा,
तू डांट के होनिया हट, त ओकारा फिर बहरिए जाना बा,
ठोठ लड़ावे में त तू पार ना पा सकब ओकारा से ए भाई,
तू विज्ञान के दू-चार बात जानेल, उ बतकुचन के खजाना बा,
मैदान करे खेत में जाये वाला, घरे कब तक बईठि,
खटिया दुवारी प डाल कुछ लोगन के रोज समाज जुटाना बा,


कभी खेती, कभी माल-गरु, कभी दूध, त कभी अनाज,
कभी सब्जी, कभी दवा-दारू, बस एही में फंसल समाज,
मन मार के उ रह ना सकेला, जेकरा घूमे के कीड़ा बा,
धरम आ काम के देके हवाला, निकलल होइहे आज,
घर में होखे गीता-रामायण, घरही बेद-पुराण गावाला,
कुछ लोग घरे आयत पढ़स, कुछ बहरी पढ़स नमाज़,


चिंता होला जब पढ़ल-लिखल, शहर में जाहिल भेटालन,
उ लोग भी एक से एक बहाना लेके, बहरी घूमे जालन,
मजबूरी के चादर ओढ़ के, निकलेला लोग बिंदास,
जुआ, खेल आ मस्ती करत, बढ़िया लोग पकड़ालन,
खीस बरेला जब लोग आपाना के, कहेला उस्ताद क दामाद,
एगो मरीज के सेवा के बेरिया, कोना में काहे लुकालन,


घूमे के काग़ज़ात बा इनका भी, जब तक नईखे लक्षण,
लक्षण मिलत-मिलत त केतना, लोग के हो जाई भक्षण,
इनकर खाईल पीयल शरीर, शायद इनिका के बचा ली,
बाकी जेकरा जेकरा में ठेकीहे, ओकर के करी संरक्षण,
जेने तेने मकौड़ा मरीहे त, बुझिह उनका के कुक्कुर,
आरोग्य सेतु ना download करीहे त कइसे होखी निरीक्षण,


कुछ मनबढुवा लोग त रोग पाल के, गूंगी सधले बाड़न,
के जानत बा कवन-कवन चीज़, उ छुवले-छवले बाड़न,
जेकरा जेकरा के घरे रहे के, कह के भेजले डॉक्टर बाबू,
उहे लोग सगरो घूम-घूम के, सारा ममिला बिगड़ले बाड़न,
दे तिया सरकार गरीबन के जब, राशन-पानी के सामान,
बिना जरूरत वाला भी ओहिजा, भीड़ लगवले बाड़न,


डॉक्टर पर पथराव देख के, मिजाज एकदम पितपिताला,
देवता के विरोध करे वाला, त असुरे नु कहल जाला,
सबसे ज़्यादा खीस बरेला, तरफदारी करे वालन पर, जे
राक्षस के राक्षस कहला पर, Secular-Secular चिलाला,
कवनो बात के आपाना धरम के, उपर जब केहु ओड़ेला,
चोर के दाढ़ी में तिनका वाला, कहावत सही बुझाला,


रिश्तेदार से मिलल दस दस रोपेया, कहीं पिग्गी फुटल,
समाज आ देश के दुश्मन बचावे में, समझदार लोग जुटल,
बिदेश में जाके पईसा वालू, वाइरस लेके लोग आइल,
Lockdown में केतना लोग के, नोकरी-चाकरी छुटल,
घर परिवार से दूर केहु, केहु घर में ही बा औंजाईल,
थाक गइल लोग घरे में रहके, एतना सुतल-सुतल,


अब पुलिस बेचारी केकरा केकरा, पर करो पहरेदारी,
केतना साफ-सफाई करस, Municipality के कर्मचारी,
डाक्टर नर्स से के कहलस, कि जान जोखिम में डालऽ,
गलती करे वाला खातिर काहे, देखावस लोग ईमानदारी,
लोग अपनही मुसीबत लेके, दोसरा पर गाज़ गिरावस,
केतना खाना पहुंचावल जाव, सभके दुवारी-दुवारी,


एगो जाहिल के बचावे खाती कुछ डाक्टर के बलिदान,
कही लोग कि चुनले बानी हम, पईसा से बढ़ के जान,
डाक्टर पुलिस पर ढेला मारे के, कवन धर्म में बा लिखल,
ई ना गीता बाइबल कहे, ना गुरु ग्रंथ साहिब ना कुरान,
समाज के दुश्मन भरल बाड़े, उ केहु के ना होखस,
जे ना वंदे मातरम कहे, आ ना हमारा भारत महान,


अब ई सब कहला में का बा, होनी त अब हो चुकल,
बाचल बा बस उहे लोग, जे जहां बा ओहिजे रुकल,
भुलल बिसरल हित मीत, अब आवे लागल ईयाद,
अब कहीं जाके उनका लोग के, समाचार लोग पुछल,
Overtime आ Tension से त, मिलल तनकी राहत,
नींद के गोली खाये लेवे वालु भी, बिना गोली के सुतल,


समाचार सुन सुन के जब, लोगवा के मन ऊबियाईल,
तब रामायण आ महाभारत, फिर से टीवी पर आइल,
देशप्रेम के पहिले जाति, धरम, समुदाय ना आवेला,
हरी अनंत हरी कथा अनंता, मुस्लिम गली में सुनाईल,
आटसप, फेसबूक त  उठ-बईठ से, असही भरल बड़ूवे,
थाली से कहीं शोर मचल, कहीं दियरी बा जगमगाईल,


कहीं पुलिस लोग गावे गाना, कहीं देखावे जादू,
कहीं पत्रकार पर भईल हमला, कहीं पिटईले साधू,
अफवाह के रफ्तार के आगे, झुकले महावीर हनुमान,
लॉकडाउन में लॉक तुड़ के, भीड़ बा भईल बेकाबू,
पत्थर, रोड़ा, ईंटा, ढेला, कहीं छत प बटोराईल,
कहीं त जान गला में लेके, भागस डाक्टर बाबू,


धर्म ना हउवे हिन्दू, मुस्लिम, पारसी, सिख, ईसाई,
धर्म त ह सभे के आपन, आपन करम कमाई,
धर्म प्रचारक खुदे धर्म के, ना जाने ला भाषा,
जवन सत्य के साथ ना देला, उ का धर्म सिखाई,
धर्म दया ह, धर्म क्षमा ह, धर्म मनुष्य के ज्ञान,
धर्म चेतना, धर्म ह भक्ति, धर्म ही दुआ-दुहाई,


हाथ धोयी साबुन-पानी से, चाहे करी Sanitize,
भोजन करी संतुलित, आ करत रही Exercise,
दाढ़ी-बाल बनाई चाहे, छोड़ दी राउर मरज़ी,
सुनी बात सरकार के, चाहे WhatsApp के advice,
मदद करी, सहयोग करी, आ बात मानी पुलिस के,
रउवे खाति नू कईले बा लोग, हेतना Sacrifice,


बिना जरूरी काम के रउवा, घर से बाहर ना जाईं,
आपन अनकर केहु होखे, दू गज के दूरी बनाईं,
एकही आदमी बहरी जाये, काम जरूरी बा त,
उहे दोकानी, उहे दूध के, उहे साग-सब्जी ले आयी,
जमाखोरी से बाचे के बा, नईखे कमी अनाज के,
घबरा कर के जल्दी-जल्दी, ज़्यादा सामान ना जुटाई,


घर में रह, चाहे बाहर रह, हमेशा नकाब लगाव,
भले खरीद बाज़ार से तू, चाहे घरही में खुदे बनाव,
हित-मीत चाहे यार संघतिया, कतनो गहरा होखस,
खून के रिश्ता होखे तब भी, आजकाल्ह घर पर ना बोलाव,
देश तोहार बा Charge हो रहल, बीच में Use मत करऽ,
ना त हो जायी Shut-Down तू, तनिका रहम देखावऽ,


आताना दिन अगर समय ना दिहलऽ, आपन कला के उपर,
अब ओकरा पर काम कर, अपना घर में ही समय बिताव,
नाचऽ - गावऽ , पढ़ऽ - लिखऽ, कुछ कविता पाठ पढ़ावऽ,
ओहू से ना त दिन-दिन भर तू, लीडो-छाका जमावऽ,
माई-बाबू के दऽ तू समय, चाहे कतही फोन धरावऽ,
मन बा त तू डायरी लिखऽ, ना त दोस्तन से बतियावऽ.
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Friday, 3 April 2020

किसी के Sorry का इंतज़ार नहीं करता...

My self-portrait sketch

मेरी प्रवृति, मेरी प्रकृति, मेरा अभिमान मांगने,
कुछ लोग आए थे मुझसे मेरी पहचान मांगने,
शब्द खंजर से लेकर कल जो आए थे पास मेरे,
कहा तो होता कि आए हैं मेरा प्राण मांगने,

कलेजे को पसलियों से छिपा रखा था मैंने,
मैं खुद भूल गया था कि कहाँ रखा था मैंने,
क्या खूब निशाना लगाया दिल तोड़ने वाले ने,
उसे बताया भी नहीं था कि वहाँ रखा था मैंने,

तुझे हक़ दिया है तो तू कर हंसी मज़ाक मुझसे,
तू मेरा दोस्त है न, तू बातें कर बेबाक मुझसे,
मुझे मार मेरी गलतियों पर या समझाओ तुम,
तेरी मर्ज़ी है तू चाहे तो हो जा नाराज़ मुझसे,

मुझे याद रहता है इतना हक़ मैंने किसे दी है,
उसे तो बिलकुल नहीं दी जो कल ही की है,
और जिसे जानता भी नहीं उसे कैसे दे दिया,
ये हक़ मांगे मुझसे फिर चाहे वो कोई भी है,

मैं ज़रा सलीके से पेश आता हूँ अनजानों से,
भले थोड़ी विनम्रता कम हो जाती है मेहमानों से,
जो भूले हुए या पुराने लोग हैं, अनजान तो नहीं,
हाँ पर कुछ खास रिश्ता नहीं मेरा दिवानों से,

भूले-बिसरे हो तो तुम मुझसे तू-तड़ाक कर लो,
मुझसे पुछो मैं कौन हूँ, मेरी आवाज़ याद कर लो,
अगर ये irritating है तो मुझे Black Listed करो,
मेरा नंबर search करो, उसके बाद बात कर लो,

लोग बड़े उम्मीद से Dial करते हैं नंबर पुराने
या तुम्हारा हाल जानना चाहते हों किसी के बहाने,
लेकिन कई बार तो नंबर बदल चुका होता है,
कभी लोग जान-बुझ कर बन जाते हैं अनजाने,

ऐसी भी बातें होती हैं, जो तुम न चाहो,
हमेशा वही फोन नहीं करता, जिसे पहचानो,
वो Wrong Number है या Right किसे पता,
उससे बात करो, उसके मकसद को जानो,

तुम कह देते बाद में करो, गर Frustrated हो,
गुस्सा हो लो, अगर किसी के लिए Awaited हो,
Call You Later का Reply दे दो, अगर Busy हो,
Clarification दे दो, जो लोगों से Irritated हो,

मैंने कोई बदतमीजी नहीं की जो तुम गाली दो,
ऐसा नहीं कि तुमने मुझसे पूछा हो, मैंने टाली हो,
कोई scheme नहीं बताई, न तुम्हारे Ex की बात की,
तुम याद करो, कोई ऐसी चीज़ जो मैंने मांगी हो,

मुझे उसका बुरा लग जाता है जो मैंने नहीं किया,
मीठे बोल की उम्मीद थी, क्या गलती वही किया,
तुमने गाली दी, तो मतलब गाली दी, चाहे किसी को,
तुम सोचते रहना तुमने गलत किया या सही किया,

तुम्हें कैसे पता मैं अनजाना हूँ, बदतमीज़ हूँ,
हो सकता था मैं दूर का रिश्तेदार हूँ, अजीज हूँ,
मैं नहीं जानता तुम कैसे React करते मेरी गाली का,
तुम Independent हो पर मैं स्थिर हूँ, दहलीज हूँ,

नाली अपनी हो या मोहल्ले की, नाली होती है,
आँख भर भी आए तब भी थोड़ी खाली होती है,
तुझे तेरी आदत, तेरी समझदारी मुबारक हो,
गाली आधी अधूरी हो तब भी वो गाली होती है,

अब क्या Sorry और Please don't mind लगाया है,
मैं देख चुका तुम्हारा चेहरा, जो तुम्ही ने दिखाया है,
इन बातों से अब मुझे कोई असर नहीं होता है,
दुख है, मेरे स्वाभिमान ने मुझे ये नहीं सिखाया है,

मैं किसी से भी उम्मीद लगातार नहीं करता,
इसीलिए सिर्फ Crush रखता हूँ, प्यार नहीं करता,
मुझे जब बुरा लगना होता है, लग जाता है,
फिर किसी के Sorry का इंतज़ार नहीं करता.


किसी को कुछ बोलने से पहले सोच लेना चाहिए, कई बार Wrong Number भी Right Number होते हैं.
कैसी लगी ये कविता, कमेंट करो यार, और मेरे Facebook page पर like करो.

Think what if people make mistakes and ask you not to mind it. I ask you not to mind and abuse you Madhar***. Won't you mind that? How is that possible. Also we have our self-respect, and we are responsible to that. If we don't mind to such mistakes, our self-respect will mind it. Don't flow in emotions all the time. The right is right, and the wrong is wrong all the time. No matter that is done mistakenly and unwillingly. May be the person, who has done the wrong, is right. So, don't be angry with him/her.
Text me in comment box, if any confusion or complication.

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Monday, 13 January 2020

इश्क़ और ठंढ.....

Fog and Smog
ये कोई कविता नहीं है, बस मन में आने वाला एक खयाल है, जिसे ज्यों का त्यों लिख दिया है।

मैं चलता जा रहा हूँ। सोचता हूँ कभी कभी, किसी किसी बात को। मुझे नहीं पता ये सबकुछ क्या चल रहा है। कभी कभी खुद में ही सरकार की नीतियों और विपक्ष के मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। लेकिन ये सब कुछ सिर्फ एक कोशिश मात्र है। मुझे पता है कि इसका कुछ होने वाला नहीं है। और मुझे ये भी पता है कि अगर कोई राजनीतिक दल अच्छा नहीं भी है तब भी हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, उसे बदलने का, या फिर उसे सुधारने का।

गाड़ी से चलने पर सड़कों की खराबी समझ में आती है। लेकिन पैदल चलने का एक अपना ही अंदाज़ है। सड़क पर बने हुए गड्ढे, और उन गड्ढों से निकली हुई एक छोटी सी पत्थर, जिसे पैरों से ठोकर मारते मारते कब आप सामने से आने वाले गाड़ी के करीब पहुँच जाते है पता नहीं चलता है। मौसम अगर ठंढ का हो तो मज़ा कुछ ज़्यादा ही हो जाता है। क्योंकि तब आपके पैरों में जुतें होते है, जो पत्थर को ठोकर मारना और आसान बना देती है।

ऐसे ही मैं भी आज जा रहा था। पैदल चल रहा था, कुछ सोचते हुए। फिर मेरे मन में चल रहा कोई सामाजिक मुद्दा जाने कब गीत में बदल गया पता ही नहीं चला। हैरान तो मैं तब हुआ जब मुझे ये एहसास हुआ कि मैं एक अंग्रेजी गाना गुनगुना रहा था।

मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं पहुंचा कहाँ तक हूँ। मोबाइल निकाल कर अपना location देखने का भी मन नहीं कर रहा था। हाथ को जैकेट के जेब में छिपा कर रखा था। कोई अंग्रेजी, या शायद कोई राहत फतेह आली ख़ान का कोई गीत गुनगुना रहा था। वजह ये थी कि शायद गीत गुनगुनाने से ठंढ का एहसास कम होता है। पर अगर ठंढ से इतना ही दिक्कत है तो घर से निकलने की ही क्या ज़रूरत थी, ये मैं समझ रहा था।

वो कहते हैं न, कि जो होनी होती है, वो होकर ही रहती है। कुछ ऐसा ही था मेरे साथ भी। उस दिन चलते-चलते मेरे सामने अचानक से वो प्रकट हो गयी। मैंने ज़रा गौर से उसके चेहरे को देखा। अरे, ये तो वही चेहरा था, जिसे मैं हमेशा देखना चाहता हूँ। कई बार मैंने कोशिश की कि उस चेहरे को अपनी आँखों में बसा लूँ, ताकि उसे देखने की बेचैनी ख़तम हो जाए। लेकिन इन आँखों में तो आँसू भी नहीं आते, फिर उसके चेहरे की तस्वीर तो बहुत बड़ी बात हो जाती है।

कई बार मैं सोचता हूँ, ये इश्क़ होता ही क्यों है। लेकिन फिर मैं सोचता हूँ, मुझे क्या है, मुझे तो इश्क़ हुआ ही नहीं है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि कभी होगा भी नहीं। हो भी सकता है कि चलते- चलते किसी मोड पर कभी इश्क़ हो जाए। वो जैसे फिल्मों में होता है न- LOVE AT FIRST SIGHT, वैसा वाला। और ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि मेरी तो एक Crush भी है। Crush तो समझते हो न?

आओ, पहले Crush ही समझा दूँ। Crush वो होता है जिसे आप प्यार नहीं करते, और न ही वो आपको प्यार करता है। मतलब हो भी सकता है कि वो आपको प्यार करता हो, लेकिन आपको ये बात पता नहीं है। यहाँ तक कि आप ये पता भी नहीं करना चाहते कि वो आपसे प्यार करता है कि नहीं, और आप अपने प्यार का इजहार भी नहीं कर पा रहे हैं। ये वो है, जिसके पास आने पर आपकी धड़कने तेज़ हो जाती हैं, घबराहट, शर्माहट, हिचकिचाहट, और सारे आहट महसूस होने लगते हैं। आप उससे बात करना चाहते हैं, लेकिन उसके पास भी नहीं जा पाते। आप उसको खुश रखना भी नहीं चाहते और परेशान भी नहीं देख सकते। Crush मतलब वो, जिसके लिए आप पढ़ने जाते हो, लेकिन पढ़ नहीं पाते। जिसे सामने बैठा कर सिर्फ देखते रहना चाहते हो, लेकिन उससे नज़र भी नहीं मिला पाते। ऐसी बहुत सी चीजे हैं, जिससे आपको लगता है कि आपका किसी पर Crush है।

Crush तो मेरी भी है। ये Crush ही तो है, जो अभी अभी दिखी है। हर बार सोचता हूँ, जी भर कर देख लूँ। देख लूँ ताकि इस चेहरे को अपनी आँखों मे बसा सकूँ। आँखों में बसा सकूँ ताकि अगली बार उसे देखने की बेचैनी न रहे। लेकिन इन आँखों में तो इतनी भी जगह नहीं है कि इनमें आँसू आ सके। मैंने अपना फोन निकाला। अभी कुछ देर पहले मैंने अपना लोकेशन देखने के लिए अपना फोन नहीं निकाला था। मुझे ठंढ लग रहा था। लेकिन अभी Crush की तस्वीर लेने के लिए मैंने फोन निकाला। सोचा, चलो आँखों में न सही, फोन में ही उसकी तस्वीर कैद कर लेता हूँ।

जैसे ही मैंने camera को on किया, उधर से Pop-Up आया, No enough space in memory. हाँ, याद आया। कुछ दोस्तों की यादें हैं, memory में। मैंने फोन का storage देखा। मेरे फोन में तो 0 KB जगह बची थी। और crush की तस्वीर कम से कम 1.5 MB का होगा। मैंने सोचा दोस्तों की यादों को memory से बाहर कर देता हूँ। लेकिन फिर सोचा- एक लड़की के लिए? और वो भी ऐसी लड़की, जिसका नाम भी नहीं पता मुझे, जबकि लगातार 6 साल से उस एक चेहरे की जगह कोई दूसरा चेहरा नहीं ले पाया है। इतने में तो लोगों के बीच S** और Break-Up भी हो जाता है।

मैं सोचता हूँ अगर कभी वो मेरे बारे में सोचती होगी तो क्या? यही न कि मैं फटटू, डरपोक, बुजदिल हूँ। क्योंकि उसे थोड़े पता है कि मुझे कभी बोलना ही नहीं है। लेकिन फिर सोचता हूँ, क्या वो मेरे बारे में सोचती भी होगी?
थोड़ा अजीब है, लेकिन सच है।

दोस्त तो ज़िंदगी की एक अटूट कड़ी होते हैं। उनकी ही यादें मिटा दूँ मैं? लेकिन यादें तो मैं फिर से भी बना सकता हूँ। लेकिन फिर से यादें बनाने के लिए इसका चेहरा memory से हटाना पड़ेगा। अजीब असमंजस है। एक तरफ दोस्त हैं, दूसरी तरफ Crush है। लेकिन किसी ने कहा है- जो मिलता है उसे रख लेना चाहिए। चलो, दोस्तों के साथ जो भी यादें है, या तो उन्हे मिटा दो या फिर छोटा कर दो। लेकिन Crush की तस्वीर तो चाहिए। क्योंकि बार बार उसे कहाँ-कहाँ ढूँढता रहूँगा मैं। फोन में अगर उसकी तस्वीर आ जाए तो क्या बात है। दोस्तों से कह भी तो पाऊँगा- ये तुमलोगों की भाभी है।

क्या ये बदनाम करना नहीं होगा? अच्छा दोस्तों से नहीं कहूँगा। मेरे इश्क़ को गुमनाम ही रहने दूंगा मैं। Feeling क्या होता है? तुम उसका पता बता दो तो मैं उसकी शादी के दिन उसकी बारात में जाकर खाना भी खा सकता हूँ। ये कोई बड़ी बात नहीं है। यहाँ तक कि बिना कुछ महसूस किए उसका जयमाला का स्टेज भी सजा सकता हूँ।

लेकिन मुझे तब भी उसकी एक तस्वीर लेनी है। चलो, उसकी तस्वीर लेने के लिए दोस्तों की यादों को नहीं मिटाऊंगा, भले खुद को ही खोना पड़े। लेकिन वो गयी कहाँ !!!!!!!!!!!!!!!?????

इतनी देर से जो मैं सोच रहा था, क्या वो सब एक ख़याल था? क्या वो एक सपना था? नहीं, चल तो रहा था मैं। सड़क पर पड़े एक पत्थर को ठोकर भी मार रहा था। क्या ये सब झूठ है? क्या वो मुझे दिखी भी थी?
मैंने खुद को एक झापड़ लगाया। चोट लगता है, इसका मतलब ये सब हक़ीक़त है, कोई सपना, कोई ख़याल नहीं है। मैं रुक कर सोच रहा था, उस चेहरे को फिर से देखना पड़ेगा। इस बार भी मैंने उसे बढ़िया से नहीं देखा।

मैं एक तरफ थोड़ा तेज़ी से भागा। इस उम्मीद में कि शायद वो फिर से दिख जाए। कुछ कहना नहीं है, बस एक आखिरी बार देखना है। या फिर उसकी तस्वीर लेनी है, ताकि दुबारा जब भी उसे देखने का मन करे तो देख सकूँ। माँ जब पूछे कि कैसी लड़की चाहिए तो दिखा सकूँ। जब कभी कोई Drawing बनाने का मन करे, तो उसकी तस्वीर बना सकूँ। लेकीन वो नहीं दिखी। अबकी बार मैं दूसरी तरफ भागा, फिर से उसी उम्मीद में। लेकिन वो फिर भी नहीं दिखी। मैं खड़ा हो गया, अब मुझे ये नहीं पता चल रहा था कि मुझे किधर जाना है और मैं आया किधर से था। मुझे उस दिन अपना location देख लेना चाहिए था !!!!!!!!!!

"सिर्फ बनारस की गलियों में ही नहीं जनाब, इश्क़ अक्सर कुहासा में भी खो जाता है।"

Thursday, 13 December 2018

Dear Future Wife...

किसी के future wife के लिए एक proposal और कुछ नहीं. इसे मेरे लिए मत समझ लेना 

Dear future wife,

     देखो ना, तुम्हारे लिए कितना मेहनत कर रहा हूँ. तुम्हारे पापा को चाहिए सरकारी नौकरी करने वाला दामाद. वही बनने की कोशिश कर रहा हूँ. ताकि तुम्हे खुश रख सकूं. बदले में तुम भी मेरे परिवार में शामिल हो जाना. तुम्हे तो पता ही है, आजकल नौकरी मिलना कितना मुश्किल है. मुझे भी कोई शौक नही है नौकरी करने का. पैसे कमाना हो तो कोई भी profession करके कमा लूंगा. जैसे किसी private sector में, या अपने skill को थोड़ा और develope करके. लेकिन तुम्हारे घरवाले ना, इतने से मानेंगे नहीं. उन्हें चाहिए सरकारी नौकरी करने वाला लड़का. बस वही बन जाऊं, तो तुम्हे भी अपने परिवार का हिस्सा बना सकूं.
     चलो हम कुछ बातें रखते है, अपने future को लेकर. चलो कुछ शर्त रखते है, जो हमारे खुशी से हुए arranged marriage वाले जीवन में लागू होंगी.
तुम सुबह देर तक सो सकती हो, अगर थकान या अजीब सा कुछ महसूस हो रहा हो तो. तुम bed पर मुझसे दो कप चाय की भी उम्मीद कर सकती हो, जो मैंने बनाई हो, साथ में सुड़कने के लिए. तुम मुझे अपना best friend बनने की उम्मीद कर सकती हो, जिसपे तुम भरोसा कर सको, जिसके साथ खुलेआम कुछ भी share कर सको. तुम मुझे एक helper समझ सकती हो, जो kitchen में तुम्हारी help करे ना करे, लेकिन तुम्हारा entertainment ज़रूर कर सकता है. तुम मुझसे अपने चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान की उम्मीद कर सकती हो.
     अगर तुम्हे पसंद है, तो छोटी छोटी बातों पर Love Fight की उम्मीद कर लेना मुझसे. अगर पसंद नही हो तो मुझे एक सलाह देने वाला समझ लेना. इसका ये मतलब नही की मैं बस सलाह देता हूँ. मुझे भी किसी की ज़रूरत होती है, कुछ decisions लेने में, वहां तुम मेरा साथ दे देना.
अगर कभी हम दोनों ये decide नही कर पाए कि सही कौन है, तो हम अपने और एक दूसरे के parents से सलाह ले सकते हैं.

     Dear Future Wife,

     तुम कभी अगर सजना-संवारना तो मेरे लिए, मेरी तारीफों के लिए नहीं. हाँ, कभी कभी मैं बढ़िया बोल देता हूँ तारीफ में, इसका ये मतलब नही कि तुम उसकी आदत डाल लो. हर बार शब्द ही नहीं होते है तारीफ करने के लिए, कभी कभी नज़रों को भी पढ़ना पड़ता है. और हाँ, मैं तुम्हारे सुंदर होने की उम्मीद नही करता, तुम्हारे अच्छे होने का उम्मीद करता हूँ. तुम कम से कम अच्छी होना.
     हर weekend पर movie या किसी trip पर ले जाऊं, ये शायद possible नही हो पायेगा मुझसे. पर तुम उम्मीद कर सकती हो उस दिन को मैं बाकी के दिनों से बेहतर कर दूंगा. हर anniversary पर gift की उम्मीद ज़रूर करना, लेकिन वो expensive हो, ये उम्मीद मत करना. और हाँ, कभी कभी अगर भूल जाऊं तो याद दिला देना, रूठ मत जाना इसके लिए.
     घर के सदस्यों को उनके ओहदे के हिसाब से respect देने की उम्मीद मैं तुमसे करता हूँ, बाकी तुम खुद उतनीं समझदार होगी, ये मुझे पता है. भले मुझे ______ के पापा बोल के मत बुलाना, अगर अच्छा नही लगे तो. तुम मुझे आप बोल सकती हो, और कभी कभी तुम भी.
     मेरी हर शायरी में खुद के ज़िक्र को expect मत कर लेना, और मेरे कविता के लफ़्ज़ों को सच मत मान लेना. क्योंकि कविता में मैं वही लिखता हूँ जो लोगो को अच्छा लगे. और अच्छी लगने वाली बातें सच नही होती.
     तुम मुझपे शक कर लेना, अगर भरोसा कम पड़ने लगे तो. लेकिन शक को शक ही रहने देना, जब तक सच ना पता चले. और जब शक को यकीन में बदलने में ज़्यादा time लग जाए तो उसे भूल जाना.
     हमारे बच्चों को सिर्फ अपनी जिम्मेदारी समझने की गलती मत कर देना तुम.
     अगर घर में या रिस्तेदारों में से किसी की बात का बुरा लगे तो मैं तुमसे उम्मीद करता हूँ तुम मुझे सबकुछ सच सच बताओगी. बदले में तुम मुझसे एक सलाह या हल की उम्मीद कर लेना. अगर तुम्हे frankness पसंद है तो तुम किसी से बात कर सकती हो, अगर पसंद है तो serial भी देख लेना एक-आध.
     रोज instagram, facebook पर close-up भेजने की उम्मीद कुछ ज़्यादा मत करना मुझसे. लेकिन अगर memory ही बनानी हो तो मेरे stupid सी हरकतों को याद रख सकती हो, किसी diary में लिखकर.
     मैं गाना गा सकता हूँ, भले ही मेरी आवाज़ बेसुरी है. लेकिन नाचने की उम्मीद मत करना मुझसे. मैंने कभी अकेले में भी नही नाचा है, खुद के लिए भी नही. कविताओं के rhythm बनाने में मैं तुम्हारे help की उम्मीद करता हूँ, घर के कामो में तुम मेरे help ले लिया करना.
     हर रोज मेरे call करने का इंतेज़ार मत करना, हर वक़्त मेरे free होने की उम्मीद मत करना. लेकिन तुम भरोसा कर सकती हो कि मैं किसी भी गलत या बुरे काम में ना तो मौजूद रहूंगा, और ना ही किसी का साथ दूंगा.

Dear Future Wife,

     मुझे पता है कि तुम कही ना कही मेरे परिवार का हिस्सा बनने के लिए थोड़ा और Mature हो रही हो. कोई बात नहीं. मुझे तुम्हारे signal की ज़रूरत नहीं है. मैं भी तुम्हारे लिए struggle कर रहा हूँ. जैसे ही मेरी struggle कम हो जाए, मैं परिवार वालों, रिस्तेदारों, दोस्तो और गांव वालो को लेकर तुम्हे लेने के लिए आऊंगा. I am sorry कि तुमको कुछ दिन wait करना पड़ रहा है.
     वैसे तो और भी बहुत कुछ है, लेकिन आखिर में एक सवाल:-
     क्या तुम अपनी परेशानियां, अपने सुख, अपनी यादें, अपने smile, अपनी हंसी, अपने feelings, अपने अनुभव, अपनी जिम्मेदारियां, अपनी थकान, अपनी इच्छाएं और भी बहुत कुछ मेरे साथ share करते हुए मेरा साथ पाना चाहोगी?




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